भारतकोश
कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished361 पृष्ठ

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३८ अथर्ववेदीय-कौशिकसूत्रम् । ॥८॥ आधाय कृष्णं प्रवाहयति ॥९॥ उपमुच्य जरदुपान- हौ सव्येन जरच्छत्रं दक्षिणेन शालातृणान्यादीप्य जीर्णं वीरिणमभिन्यस्यति ॥१०॥ अनावृतमावृत्य सकृ- ज्जुहोति ॥११॥ सव्यं प्रहरत्युपानहौ च ॥१२॥ जीर्णे वीरिण उपसमाधायायं ते योनिरिति जरत्कोष्ठाद्व्रीहि- च्छर्करामिश्रानावपति ॥१३॥ आ नो भरेति धानाः ॥१४॥ युक्ताभ्यां सह कोष्ठाभ्यां तृतीयाम् ॥१५॥ कृष्ण- शकुनेः सव्यजंघायामङ्कमनुबध्याङ्के पुरोडाशं प्रपतेत इत्य- नावृतं प्रपादयति ॥१६॥ नीलं सन्धाय लोहितमाच्छाद्य शुक्लं परिणह्य द्वितीयोष्णीषमङ्केनोपसाद्य सव्येन सहाङ्केनावाडप्सुप्रविध्यति