कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ
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२४ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ पहला अधिकरण
(१)
तस्माद् बाह्यमधिष्ठानं कृत्वा कार्ये चतुर्विधे ।
शौचाशौचममात्यानां राजा मार्गेत सत्त्रिभिः ॥
इति विनयाधिकारिके प्रथमाधिकरणे उपधाभिः शौचाशौच-
ज्ञानममात्यानां नवमोऽध्यायः ।
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तब तक चैन नहीं लेती, जब तक उसने अभीष्ट को प्राप्त न कर लिया हो (अर्थात् अपने अपमान का बदला न ले लिया हो) ।
(१) इसलिये सर्वोत्तम यही है कि उक्त चारों उपायों से परीक्षण के लिए राजा, किसी बाह्य वस्तु को माध्यम बनाये और गुप्तचरों द्वारा अमात्यों के चरित्र की परीक्षा करे ।
विनयाधिकारिक प्रथम अधिकरण में नवाँ अध्याय समाप्त ।
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