भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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प्र० ९ : अ० १३ ] कृत्य-अकृत्य पक्ष को मिलाना ४१

(१) परीक्षीणोऽत्यात्सवः कदर्यो व्यसन्यत्याहितव्यवहारश्चेति लुब्धवर्गः ।
(२) आत्मसम्भावितो मानकामः शत्रुपूजामर्षितो नीचैरुपहितस्तीक्ष्णः साहसिको भोगैनासन्तुष्ट इति मानिवर्गः ।
(३) तेषां मुण्डजटिलव्यञ्जनैर्यो यद्भक्तिः कृत्यपक्षीयस्तं तेनोप-जापयेत् ।
(४) यथा मदान्धो हस्ती मत्तोनाधिष्ठितो यद्यदासादयति तत् सर्वं प्रमृद्गात्येवमयम् अशास्त्रचक्षुरन्धो राजाऽन्धेन मन्त्रिणाऽधिष्ठितः, पौरजान-पदवधायाभ्युत्थितः । शक्यमस्य प्रतिहस्तिप्रोत्साहनेनापकर्तुम् । अमर्षः क्रियताम्-इति क्रुद्धवर्गमुपजापयेत् ।
(५) यथा लीनः सर्पो यस्माद् भयं पश्यति तत्र विषमुत्सृजत्येवमयं राजा जातदोषाशङ्कस्त्वयि पुरा क्रोधविषमुत्सृजति । अन्यत्र गम्यताम्-इति भीतवर्गमुपजापयेत् ।


घबड़ा गया हो; भूमि का अपहरण करने वाला; जो दण्ड के द्वारा वश में किया गया हो; सभी राजकीय विभागों पर जिसका अधिकार हो; अपनी कार्यक्षमता से जिसने प्रभूत धन एकत्र कर लिया हो; जो राजा के किसी वंशज हिस्सेदार के निकट कुछ कामना से रहता हो; जिससे राजा शत्रुता रखता हो और जो राजा से शत्रुता रखता हो—इस प्रकार से सभी लोग 'भीतवर्ग' कहलाते हैं ।

(१) जिसका सब धन-वैभव नष्ट हो गया; जो कायर, व्यसनी और अपव्ययी हो, वह 'लुब्धवर्ग' कहलाता है ।

(२) अपने को महान् समझनेवाला; आत्मश्लाघी; शत्रु के सम्मान को सहन न करनेवाला; नीच लोगों द्वारा प्रशंसित; तीक्ष्णप्रकृति; साहसी और भोग्य-पदार्थों से कभी सन्तुष्ट न होनेवाला वर्ग ही 'मानिवर्ग' कहलाता है ।

(३) उक्त क्रुद्ध, लुब्ध, भीत आदि कृत्यपक्ष के लोगों में से जिस मुण्ड या जटिल गुप्तचर के जो-जो भक्त हों उसको वही गुप्तचर अपने वश में करें ।

(४) गुप्तचर, क्रुद्धवर्ग के लोगों को उनके स्वामी से यह कह कर फोड़े, 'देखो, जैसे उन्मत्त पीलवान से चलाया गया मतवाला हाथी अपने सामने जो-कुछ भी देखता है, उसे कुचल डालता है, उसी प्रकार शास्त्ररूपी आँखों से हीन, अपने अंधे मंत्री के साथ रहता हुआ यह राजा राष्ट्र और प्रजा को नष्ट करने के लिए उद्यत है । ऐसी अवस्था में इस राजा से शत्रुता रखने वाले लोगों को उभाड़ देने से उसका अपकार किया जा सकता है । इस राजा के प्रति तुम्हें कुपित होना चाहिए ।' यह कहकर क्रुद्धवर्ग को राजा से फोड़ दे ।

(५) भीतवर्ग को अपने वश में करने के लिए गुप्तचर ऐसा कहे—'देखो, जैसे डरा हुआ साँप जिससे भय खाता है उसी पर अपना विष उगल देता है, उसी प्रकार यह राजा भी तुमसे शंकित है और सर्वप्रथम यह तुम्हारे ऊपर क्रोधरूपी विष उगलने