कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें| ११६ | कौटिल्य का अर्थशास्त्र | [ दूसरा अधिकरण |
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(१) तस्मादस्य यो यस्मिन्नधिकरणे शासनस्थः स तस्य कर्मणो याथातथ्यमायव्ययौ च व्याससमासाभ्यामाचक्षीत । (२) मूलहरतादात्विककदर्यांश्र्च प्रतिषेधयेत् । यः पितृपैतामहमर्थमन्या-येन भक्षयति स मूलहरः । यो यद्यदुत्पद्यते तत्तद् भक्षयति स तादात्विकः । यो भृत्यात्मपीडाभ्यामुपचिनोत्यर्थं स कदर्यः । सः पक्षवांश्चेदनादेयः । विपर्यये पर्यादातव्यः । (३) यो महत्यर्थसमुदये स्थितः कदर्यः सन्निधत्ते, अवनिधत्ते, अवस्रा-वयति वा—सन्निधत्ते स्ववेश्मनि, अवनिधत्ते पौरजानपदेषु अवस्रावयति परविषये—तस्य सत्री मन्त्रिमित्रभृत्यबन्धुपक्षमार्गतिं गतिं च द्रव्याणा-मुपलभेत । (४) यश्चास्य परविषये सञ्चारं कुर्यात्तमनुप्रविश्य मन्त्रं विद्यात् । सुविदिते शत्रुशासनापदेशेनैनं घातयेत् । (५) तस्मादस्याध्यक्षाः संख्यायकलेखकरूपदर्शकनीवीग्राहकोत्तरा-ध्यक्षसखाः कर्माणि कुर्युः ।
( १ ) इसलिए प्रत्येक राजकीय अधिकारी का कर्तव्य है कि अपने कार्य की यथार्थता और तत्सम्बन्धी आय-व्यय का विवरण वह संक्षेप में तथा विस्तार से राजा के संमुख प्रस्तुत करे ।
( २ ) उसका यह भी कर्तव्य है कि वह मूलहर, तादात्विक तथा कदर्य पुरुषों पर भी अंकुश रखे । अपनी वंशानुगत संपत्ति का उपभोग जो अन्याय से करता है वह मूलहर है । जो पुरुष जितना उत्पन्न करता है उतना ही व्यय भी कर लेता है, वह तादात्विक कहलाता है । जो अपने को और अपने नौकरों को कष्ट देकर धनो-पार्जन करता है । वह कदर्य कहा जाता है । यदि निषेध करने पर भी ये मूलहर आदि अपने कार्यों को न छोड़ें तो ( यदि उनके बंधुबांधव न हों ) उनकी संपत्ति को जब्त कर लिया जाय और बंधु-बांधव हों तो उन्हें पदच्युत कर दिया जाय ।
( ३ ) जो कदर्य ( कंजूस ) पदाधिकारी गहरी आमदनी करता है, धन को भूमि में गाड़ता है, उसको किसी के पास छिपाकर रखता है, शत्रुदेश में भेजकर किसी के पास जमा करता है, उस अधिकारी के परामर्शदाता, मित्र, नौकर, बंधु-बांधव और आय-व्यय आदि का पता गुप्तचर प्राप्त करें ।
( ४ ) गुप्तचर को चाहिए कि वह कदर्य अधिकारी के धन की शत्रुदेश में ले जानेवाले पुरुष से मिलकर अथवा उसका सेवक बनकर, उसके रहस्य का पता लगावे । गुप्तचर द्वारा राजा को जब इस भेद की सही जानकारी प्राप्त हो जाये तो वह शत्रु के आदेश का बहाना बनाकर उस कदर्य अधिकारी को मरवा डाले ।
( ५ ) इसलिए प्रत्येक विभाग के सभी अध्यक्षों को चाहिये कि वे संख्यानक