भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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१३० कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ दूसरा अधिकरण

गन्धि । हरिचन्दनं शुकपत्रवर्णमाम्रगन्धि । तार्णसं च । ग्रामेरुकं रक्तं रक्त- कालं वा वस्तमूत्रगन्धि । दैवसभेयं रक्तं पद्मगन्धि । जावकं च । जोङ्गकं रक्तं रक्तकालं वा स्निग्धम् । तौरूपं च । मालेयकं पाण्डुरक्तम् । कुचन्दनं कालवर्णकं गोमूत्रगन्धि । कालपर्वतकं रूक्षमगुरुकालं रक्तं रक्तकालं वा । कोशकारपर्वतकं कालं कालचित्रं वा । शीतोदकीयं पद्माभं कालस्निग्धं वा । नागपर्वतकं रूक्षं शैलवर्णं वा । शाकलं कपिलमिति ।

(१) लघु स्निग्धमश्यानं सर्पिः स्नेहलेपि गन्धसुखं त्वगनुसार्यनुल्बण- मविराग्युष्णसहं दाहग्राहि सुखस्पर्शनमिति चन्दनगुणाः ।


उसमें धरती की सोंध होती है, २. गोशीर्ष देश में उत्पन्न चन्दन कालिमा एवं लाली लिए होता है और उसमें मछली की जैसी गन्ध होती है, ३. हरि नामक देश में उत्पन्न चन्दन तोते के पंख के समान हरे रंग का और उसमें आम की जैसी महक होती है, ४. तृणसा नामक नदी के किनारे उत्पन्न होने वाला चन्दन भी हरिचन्दन के ही समान होता है, ५. ग्रामेरु प्रदेश में उत्पन्न चन्दन या तो लाल रंग का अथवा लाल-काले मिले हुए रंग का होता है और उसमें बकरे की पेशाब जैसी गन्ध होती है, ६. देवसभा नामक स्थान में उत्पन्न चन्दन लाल रंग का और पद्म के समान सुगन्धि वाला होता है, ७. जाबक देश का चन्दन भी देवसभा चन्दन की भाँति होता है, ८. जोंग देश में उत्पन्न चन्दन या तो लाल रंग का अथवा लाल-काला रंग का चिकना होता है और वह भी पद्म के समान सुगन्धित होता है, ६. तुरूप देश का चन्दन भी जोंगरु की भाँति होता है, १०. माल देश में उत्पन्न चन्दन का रंग लाल-पीला होता है, उसमें पद्म के समान सुगन्ध होती है, ११. कुचन्दन काले रंग का तथा गोमूत्र के समान गन्ध वाला होता है, १२. काल पर्वत पर उत्पन्न चन्दन खुर-दुरा, अगर के समान काला या लाल या लाल-काला होता है और उसमें भी गोमूत्र जैसी गन्ध होती है, १३. कोशकार पर्वत पर उत्पन्न चन्दन काला अथवा चितकबरा होता है, १४. शीतोदक देश में उत्पन्न चन्दन पत्र के रंग का या काला अथवा स्निग्ध होता है, १५. नाग पर्वत पर उत्पन्न चन्दन रूखा और सेवार के रंग जैसा होता है, १६. शाकल देश में उत्पन्न चन्दन पीला-लाल ( कपिल ) वर्ण का होता है ।

( १ ) चन्दन में ग्यारह गुण होते हैं—१. लघु २. स्निग्ध ३. बहुत दिनों में सूखने वाला, ४. शरीर में घी के समान लगने वाला, ५. सुगन्धित, ६. त्वचा के भीतर ठंडक पहुँचाने वाला, ७. बिना फटा, ८. स्थायी वर्ण एवं गन्ध वाला, ९. गर्मी शांत करने वाला, १०. सन्ताप को दूर करने वाला और ११. सुखकर स्पर्श वाला ।