भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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प्र० २७ : अ० ११ ] रत्नों की परीक्षा १३१

(१) अगुरु—जोङ्गकं कालं कालचित्रं मण्डलचित्रं वा । श्यामं दोङ्ग- कम् । पारसमुद्रकं चित्ररूपम् । उशीरगन्धि नवमालिकागन्धि वेति । (२) गुरु स्निग्धं पेशलगन्धि निर्हारि अग्निसहमसंप्लुतधूमं समगन्धं विमर्दसहम् इत्यगुरुगुणाः । (३) तैलपर्णिकम्—अशोकग्रामिकं मांसवर्णं पद्मगन्धि । जोङ्गकं रक्तपीतकमुत्पलगन्धि गोमूत्रगन्धि वा ग्रामेरुकं स्निग्धं गोमूत्रगन्धि । सौवर्णकुड्यकं रक्तपीतं मातुलुङ्गगन्धि । पूर्णकद्वीपकं पद्मगन्धि नवनीत- गन्धि वेति । (४) भद्रश्रीयम्—पारलौहित्यकं जातीवर्णम् । आन्तरवत्यमुशीर- वर्णम् । उभयं कुष्ठगन्धि चेति । (५) कालेयकः—स्वर्णभूमिजः स्निग्धपीतकः । औत्तरपर्वतको रक्त- पीतकः इति साराः ।


( १ ) अगर का निरूपण इस प्रकार है—जौंगल नामक अगर तीन तरह का होता है : काला, चितकबरा और काले-सफेद दागों वाला । दोंगक नामक अगर काला होता है, जोंगक और दोंगक दोनों आसाम में पैदा होते हैं । समुद्र पार पैदा होने वाला अगर, चित्र रूप का होता है, जिसकी गन्ध खश और चमेली जैसी होती है ।

( २ ) भारी, स्निग्ध, सुगन्धित, दूर तक सुगन्ध फेंकने वाला, अग्नि को सहन करने वाला, जिसका धुआँ व्याकुल न कर दे, जलते समय एक जैसी गन्ध देने वाला और वस्त्र आदि पर पोंछ देने से गन्ध बनी रहना; ये अगर के गुण हैं ।

( ३ ) असम में पैदा होने वाला तैलपर्णिक चन्दन मांस के रङ्ग का और पद्म के समान गन्ध वाला होता है । असम में ही पैदा होने वाला दूसरा तैलपर्णिक चन्दन लाल-पीले रङ्ग का और कमल अथवा गोमूत्र की गन्ध का होता है । ग्रामेरू प्रदेश में पैदा होने वाला चन्दन चिकना और गोमूत्र की गन्ध का होता है । असम के सुवर्णकुड्य नामक स्थान में पैदा होने वाला चन्दन लाल-पीला और नीबू की गन्ध का होता है । पूर्णक द्वीप में उत्पन्न चन्दन पद्म अथवा मक्खन की गन्ध का होता है ।

( ४ ) भद्रश्रीय नामक चन्दन दो प्रकार का होता है : १. पारलौहित्य और २. आन्तरवत्य । पारलौहित्य असम में पैदा होता है और उसका रङ्ग चमेलीपुष्प जैसा होता है, आन्तरवत्य चन्दन भी असम में ही पैदा होता है, उसका रङ्ग खस की भांति होता है । इन दोनों की गन्ध कूट औषधि की तरह होती है ।

( ५ ) कालेयक नामक चन्दन स्वर्णभूमि में पैदा होता है और वह स्निग्ध एवं पीले रङ्ग का होता है । हिमालय पर पैदा होने वाला कालेयक लाल-पीले रङ्ग का होता है । यहाँ तक सार वस्तुओं का विवरण प्रस्तुत किया गया है ।

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