भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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प्र० २६ : अ० १३ ] सुवर्णाध्यक्ष के कार्य १४५

चूर्णितमुपांधि विद्यात् । जातिहिङ्गुलकेन पुष्पकासीसेन वा गोमूत्रभावितेन दिग्धेनाग्रहस्तेन संस्पृष्टं सुवर्णं श्वेतीभवति । (१) सकेसरः स्निग्धो मृदुभ्राजिष्णुश्च निकषरागः श्रेष्ठः । (२) कालिङ्गकस्तापीपाषाणो वा मुद्गवर्णो निकषः श्रेष्ठः । समरागी विक्रयक्रयहितः । हस्तिच्छविकः सहरितः प्रतिरागी विक्रयहितः । स्थिरः परुषो विषमवर्णश्चाप्रतिरागी क्रयहितः । (३) छेदश्चिक्कणः समवर्णः श्लक्ष्णो मृदुभ्राजिष्णुश्च श्रेष्ठः । (४) तापे बहिरन्तश्च समः किञ्जल्कवर्णः कुरण्डकपुष्पवर्णो वा श्रेष्ठः । श्यावो नीलश्चाप्राप्तकः ।


उनमें समान वर्ण तथा समान रेखाएँ दिखाई दें; घिसने से ऊँचा-नीचा न हो तो वर्णक को ठीक समझना चाहिए । १. यदि विक्रेता वर्णक को उत्कृष्ट बताने के उद्देश्य से कसौटी को उस पर जोर से रगड़ दें, या २. विक्रेता उसकी हीनता बताने के लिए कसौटी को धीरे से रगड़े, अथवा ३. नाखून में गेरु आदि कोई लाल-पीली वस्तु छिपाकर सोने के साथ कसौटी पर रेखा बना दे, तो इस प्रकार से यह तीनों प्रकार का कपटपूर्ण व्यवहार कहा जाता है । कपटी सर्राफ सोने को घटिया सिद्ध करने के लिए गो-मूत्र में भावना दिये गये एक विशेष प्रकार के सिंगरफ के साथ कुछ पीले रङ्ग के हरताल के साथ लिपटे हुए लेप को हाथ के अग्रभाग के स्पर्श से सोने का रङ्ग फीका कर देते हैं ।

(१) केसर के समान रङ्ग वाली, स्निग्ध, मृदु और चमकदार रेखा जिस कसौटी पर खिंचे, उसे सर्वोत्तम समझना चाहिए ।

(२) कलिङ्ग देश के महेन्द्र पर्वत से अथवा तापी नदी से उत्पन्न, मूंग के समान आकृति वाली कसौटी सर्वोत्तम समझनी चाहिए । सोने के रङ्ग को ठीक तरह से ग्रहण करने वाली कसौटी क्रेता-विक्रेता, दोनों के लिए उचित है। हस्तिचर्म के समान खरखरी, हरे रङ्ग की और विपरीत रङ्ग को बताने वाली कसौटी सोना बेचने वालों के हक में अच्छी है । इसी प्रकार ठोस, कठोर, खरखरी, तरह-तरह के रङ्गों वाली और असली रङ्ग को न बताने वाली कसौटी सोना खरीदने वालों के लिए अच्छी नहीं है ।

(३) चिकना, बाहर-भीतर एक रङ्ग वाला, स्निग्ध, मृदु और चमकदार, सोने का टुकड़ा श्रेष्ठ समझा जाता है ।

(४) यदि सोने का टुकड़ा, तपाये जाने पर, बाहर भीतर एक ही रङ्ग दे या वह कमलरज के समान दिखाई दे या वह कुणरड के फूल की भाँति हो जाय तो उसे

१० कौ०