कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्र० ३० : अ० १४ ] राजकीय स्वर्णकारों के कर्तव्य १५५
(१) कृतभाण्डपरीक्षायां पुराणभाण्डप्रतिसंस्कारे वा चत्वारो हर- णोपायाः—परिकुट्टनमवच्छेदनमुल्लेखनं परिमर्दनं वा । पेटकापदेशेन पृषतं गुणं पिटका वा यत् परिशातयन्ति तत् परिकुट्टनम् । यद् द्विगुण- वास्तुकानां वा रूपे सीसरूपं प्रक्षिप्याभ्यन्तरमवच्छिन्दन्ति तदवच्छेदनम् । यद्घनानां तीक्ष्णेनोल्लिखन्ति तदुल्लेखनम् । हरितालमनःशिलाहिङ्गुलक- चूर्णानामन्यतमेन कुरुविन्दचूर्णेन वा वस्त्रं संयूह्य यत् परिमृद्नन्ति तत् परिमर्दनम् । तेन सौवर्णराजतानि भाण्डानि क्षीयन्ते । न चैषां किञ्चिद- वरुग्णं भवति । (२) भग्नखण्डघृष्टानां संयूह्यानां सदृशेनानुमानं कुर्यात् । अवले- प्यानां यावदुत्पाटितं तावदुत्पाट्यानुमानं कुर्यात् । विरूपाणां वा । तापन- मुदकपेषणं च बहुशः कुर्यात् । (३) अवक्षेपः प्रतिमानमग्निर्गण्डिका भण्डिकाधिकरणी पिच्छः सूत्रं
जाति, उनके रूप, गुण, प्रमाण, पुद्गल और लक्षण आदि को भली-भांति जाने, जिससे कोई व्यक्ति उनका अपहरण न कर सके ।
( १ ) पात्र और आभरण आदि के तैयार हो जाने पर, उनकी परीक्षा करते समय भी सोने आदि का चार प्रकार से अपहरण किया जा सकता है : १. परिकुट्टन से, २. अवच्छेदन से, ३. उल्लेखन से और ४. परिमर्दन से । पूर्वोक्त पेटक ढंग से परीक्षा करने के बहाने जो छोटे टुकड़े या छोटी गोली सुनार काट लिया करते हैं उसे ही परिकुट्टन कहते हैं। पत्रों से जुड़े आभूषणों में सोने मढ़े हुये कुछ सीसा के पत्ते मिलाकर और भीतर से काटकर सोना निकाल लेना ही अवच्छेदन कहलाता है । ठोस गहनों को तेज औजार से खोद देना ही उल्लेखन है । हरताल, सिंगरफ, मैनसिल और कुरुविन्द पत्थर के चूर्ण को कपड़े के साथ सानकर, उससे आभूषणों को रगड़ा जाना हो परिमर्दन कहलाता है । ऐसा करने से आभरण घिस जाते हैं; किन्तु उनपर किसी प्रकार की खरोंच या चोट नहीं दिखाई देती है ।
( २ ) परिकुट्टन अवच्छेदन आदि कपट उपायों से जितने सुवर्ण का अपहरण किया गया हो, उसका ब्योरा, उसके समानजातीय शेष अवयवों से प्राप्त करना चाहिए । जिन आभूषणों पर अवलेप्य का प्रयोग किया गया हो, उस पर से कटे सोने के टुकड़े को देखकर उसकी क्षति का अनुमान किया जाय । जिन आभूषणों में अधिक खोटा माल मिला दिया गया हो उनकी हानि का परिमाण, उनके सदृश दूसरे आभूषणों को तौलकर जाना जाय । उनको आग में तपाकर पानी में छोड़ दिया जाय और तब हथौड़े से चोट करके उनकी शुद्धता को जाँचा जाय ।
( ३ ) अपहरण के और भी तरीके हैं : १. अवक्षेप ( हाथ की सफाई से खरे