भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

पृष्ठ 244, कुल 918 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 244

१६० कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ दूसरा अधिकरण

(१) क्षुण्णघृष्टपिष्टभृष्टानामार्द्रशुष्कसिद्धानां च धान्यानां वृद्धिक्षय-प्रमाणानि प्रत्यक्षीकुर्वीत । (२) कोद्रवव्रीहीणामर्ध सारः, शालीनामष्टभागोनः, त्रिभागोनो वरककाणाम् प्रियङ्गूणामर्ध सारो नवभागवृद्धिश्च । उदारकस्तुल्यः । यवा गोधूमाश्च क्षुण्णाः । (३) तिला यवा मुद्गमाषाश्च घृष्टाः । पञ्चभागवृद्धिर्रोधूमः सक्तवश्च । पादोना कलायचमसी । मुद्गमाषाणामर्धपादोना । शैम्बानामर्ध सारः । त्रिभागोने मसूराणाम् । (४) पिष्टमामं कुल्माषश्चाध्यर्धगुणः । द्विगुणो यावकः । पुलाकः पिष्टं च सिद्धम् । (५) कोद्रववरकोदारकप्रियङ्गूणां, त्रिगुणमन्नं, चतुर्गुणं व्रीहीणाम्, पञ्चगुणं शालीनाम्, तिमितमपरान्नं द्विगुणमर्धाधिकं विरूढानाम् ।


के लिए सुरक्षित रखे । आधी उपज का उपयोग स्वयं कर ले । इसी प्रकार नई फसल या नया सामान आ जाने पर पुराने स्टाक को उपयोग में ले लिया जाय और उसकी जगह नया स्टाक भर दिया जाय ।

(१) कोष्ठागार के अध्यक्ष को चाहिए कि वह कूटा हुआ, साफ किया हुआ, पीसा हुआ, भूना हुआ, भीगा हुआ, सुखाया हुआ और पकाया हुआ; जितना भी धान्य है; अपने सामने तुलवाकर उसकी घट-बढ़ की जाँच करें ।

(२) उनकी घट-बढ़ का नियम इस प्रकार है : कोदों और धान में आधी भूसी निकल जाती है; बढ़िया धान का भी आधा भाग भूसी में निकल जाता है, लोभिया आदि अनाजों में तीसरा हिस्सा चोकर का निकल जाता है । काकुन में प्रायः आधा हिस्सा भूसी निकल जाती है, किन्तु कभी-कभी उसका नवाँ हिस्सा भी बढ़ जाता है । मोटे चावल में आधा ही भाग बन पाता है, जौ और गेहूं में कूटने पर छीजन नहीं होती है ।

(३) तिल, जौ, मूंग और उड़द भी दलने पर बराबर बने रहते हैं गेहूं और भुने हुए जौ पीसने पर पञ्चमांश बढ़ जाते हैं । मटर पीसने पर चौथाई हिस्सा कम हो जाती है । पीसने पर मूंग और उड़द का आठवाँ हिस्सा कम हो जाता है । ज्वार की फलियों में आधा चोकर निकल जाता है । दलने पर मसूर का तीसरा हिस्सा कम हो जाता है ।

(४) पिसे हुए कच्चे गेहूँ तथा मूंग और उड़द आदि पकाये जाने पर ड्योढ़े हो जाते हैं । पकाये जाने पर चावल और सूजी भी दुगुने हो जाते हैं ।

(५) कोदों, लोभिया, उदारक और कांगनी पकाये जाने पर तिगुने हो जाते