भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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प्रकरण ३३कुप्याध्यक्षः
अध्याय १७

(१) कुप्याध्यक्षो द्रव्यवनपालैः कुप्यमानाययेत् । द्रव्यवनकर्मान्तांश्च प्रयोजयेत् द्रव्यवनच्छिदां च देयमत्ययं च स्थापयेदन्यत्रापद्भ्यः । (२) कुप्यवर्गः—शाकतिनिशधन्वनार्जुनमधूकतल कसा लशिश पारिमे-दराजादनशिरीषखदिरसरलतालसर्जश्वकर्णसोमवल्ककश। म्नप्रियकधवादिः सारदारुवर्गः । (३) उटजचिमियचापवेणुवंश सातीनकण्टकभाल्लूकादिर्वेणुवर्गः । (४) वेत्रशीकवल्लीवाशीश्यामलतानागलतादिर्वल्लीवर्गः ।


कुप्य का अध्यक्ष

( १ ) कुप्य के अध्यक्ष को चाहिए कि वह जंगल की रक्षा में नियुक्त पुरुषों द्वारा बढ़िया-बढ़िया लकड़ी मंगवाये । लकड़ी से बनने योग्य दूसरे कार्यों को भी वही करवाये । लकड़ी काटकर जीविकोपार्जन करने वाले लोगों को वह वेतन पर नियुक्त कर ले और आज्ञा का उल्लंघन करने पर उनके लिए दण्ड भी निर्धारित कर ले; किन्तु किसी आपत्ति के कारण कार्य में विघ्न उपस्थित हो जाय तो उन्हें दण्ड न दिया जाय ।

( २ ) कुप्यवर्ग में सर्वप्रथम सारदारु वर्ग ( सर्वोत्तम लकड़ी ) का निरूपण किया जाता है : शाक ( सागून ), तिनिश ( तैहुँआ ), धन्वस ( पीपल ), अर्जुन, मधुक ( महुआ ), तिलक ( फरास ), साल, शिंशपा ( शीशम ), अरिमेद ( दुर्गन्धित खैर ), राजादन ( खिरनी ), शिरीष ( सिरसा ), खदिर ( खैर ), सरल ( देवदारु) ताल ( ताड़ ), सर्ज ( साल ), अश्वकर्ण ( बड़ा साल ), सोमवल्क ( सफेद खैर ), कश ( बबूल ), आम्र, प्रियक ( कदंब ), धव ( गूलर ) आदि सर्वोत्तम लकड़ी सारदारुवर्ग के अन्तर्गत हैं ।

( ३ ) उटज ( खोखला ), चिमिय ( ठोस ), चाप ( कुछ पोला और ऊपर से खुरदरा ), वेणु ( चिकना, पोला ), वंश ( लंबी पोरियों वाला ), सातीन, कंटक ( दोनों काँटेदार ) और भाल्लूक ( मोटा, लंबा, कंटकरहित ), ये सब बाँसों के भेद हैं ।

( ४ ) वेत्र ( बेंत ), शीकबल्ली ( हंसबल्ली ), वाशी ( सफेद फूलों की लता), श्यामलता ( काली लता ), नागलता, ( नागबल्ली ) आदि सब लताओं के भेद हैं ।