भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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प्रकरण ३४## आयुधागाराध्यक्षः
अध्याय १८

(१) आयुधागाराध्यक्षः साङ्ग्रामिकं दौर्गकर्मिकं परपुराभिघातिकं यन्त्रमायुधमावरणमुपकरणं च तज्जातकारुशिल्पिभिः कृतकर्मप्रमाणकालवेतनफलनिष्पत्तिभिः कारयेत् । स्वभूमौ च स्थापयेत् । स्थानपरिवर्तनमातपप्रवातप्रदानं च बहुशः कुर्यात् । ऊष्मोपस्नेहकृमिभिरुपहन्यमानमन्यथा स्थापयेत् । जातिरूपलक्षणप्रमाणागममूल्यानिक्षेपैश्चोपलभेत ।

(२) सर्वतोभद्रजामदग्न्यबहुमुखविश्वासघातिसङ्घाटीयानकपर्जन्यकबाहूर्ध्वबाह्वर्धबाहूनि स्थितयन्त्राणि ।


आयुधागार का अध्यक्ष

( १ ) आयुधागार के अध्यक्ष को चाहिए कि वह, युद्धोपयोगी सामग्री तैयार करने वाले कारीगरों एवं कुशल शिल्पियों के द्वारा युद्ध में काम देने वाले, दुर्ग की रक्षा के योग्य शत्रु के नगर को विध्वंस कर देने वाले सर्वतोभद्र ( मशीनगन ), जामदग्न्य आदि यन्त्र, शक्ति, धनुष आदि हथियार कवच और सवारी आदि जितने भी साधन हैं, उनका निर्माण करवाये; उन कारीगरों से कितने समय में कितनी मजदूरी देकर कितना काम कराया जाय इत्यादि बातों को वह पहिले ही से निश्चित कर ले । तैयार हुए सामान को उसके उपयुक्त स्थान में रखवा दिया जाय अथवा अपने ही कब्जे में रखा जाय । अध्यक्ष को चाहिए कि जिससे समान पर जंक आदि न लगे, उसको धूप-हवा भी दिलाता रहे, गर्मी, सील और घुन आदि के कारण जो हथियार खराब हो रहे हों उन्हें वहां से उठवा कर किसी ऐसे स्थान में रखवा दे, कि वे अधिक खराब न होने पावें, उन हथियारों के जाति स्वरूप, लक्षण, लम्बाई, चौड़ाई, मोटाई प्राप्तिस्थान मूल्य और उपयुक्त स्थान आदि के सम्बन्ध में प्रत्येक बात को अच्छी तरह से समझ-बूझ ले ।

( २ ) दश प्रकार के स्थितयंत्र होते हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है : १. सर्वतोभद्र ( मशीनगन ), २. जामदग्न्य ( जिसमें बीच के छेद से बड़े-बड़े गोले निकलें ), ३. बहुमुख ( किले की दीवारों में ऊँचाई पर बनाये गये वे स्थान, जहां से सैनिक गोलीवर्षा कर सकें ), ४. विश्वासघाती ( नगर के बाहर तिरछी बनावट का एक ऐसा यन्त्र, जिसको छू लेने से ही प्राणान्त हो जाय ), ५. संघाटि ( लंबे-ऊँचे बांसों से बना हुआ वह यंत्र, जो महलों के ऊपर रोशनी फेंके ), ६. यानक