भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

पृष्ठ 267, कुल 918 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 267

प्र० ३६ : अ० २० ] देश और काल का मान १८३

भागः, चतुष्पौरुष्यामष्टभागः, द्विपौरुष्यां षड्भागः, पौरुष्यां चतुर्भागः, अष्टाङ्गुलायां त्रयोदशभागाः, चतुरङ्गुलायामष्टभागाः, अच्छाया मध्याह्न इति । (१) परावृत्ते दिवसे शेषमेव विद्यात् । (२) आषाढे मासि नष्टच्छायो मध्याह्नो भवति । अतः परं श्रावणादीनां षण्मासानां द्वयङ्गुलोत्तरा माघादीनां द्वयङ्गुलावरा छाया इति । (३) पञ्चदशाहोरात्राः पक्षः । सोमाप्यायनः शुक्लः सोमावच्छेदनो बहुलः । (४) द्विपक्षो मासः । त्रिंशदहोरात्रः प्रकर्ममासः । सार्धः सौरः । अर्धन्यूनश्चान्द्रमासः । सप्तविंशतिर्नक्षत्रमासः । द्वात्रिंशद् मलमासः । पञ्चत्रिंशदश्ववाहायाः । चत्वारिंशद्धस्तिवाहायाः । (५) द्वौ मासावृतुः । श्रावणः प्रोष्ठपदश्च वर्षाः । आश्वयुजः कार्तिकश्च


४८ अङ्गुल लम्बी रहने पर आठवां हिस्सा, २४ अङ्गुल लम्बी रहने पर छठा हिस्सा, १२ अङ्गुल लम्बी रहने पर चौथा हिस्सा, ८ अङ्गुल लम्बी रहने पर दिन के दस भागों में तीसरा हिस्सा, चार अङ्गुल लम्बी रह जाने पर आठ भागों में तीसरा हिस्सा और जब छाया बिल्कुल न रहे तो मध्याह्न समझना चाहिए ।

(१) मध्याह्न अर्थात् बारह बजे के बाद उक्त छाया-मान के अनुसार दिन का शेष भाग समझना चाहिए ।

(२) आषाढ़ के महीने की दोपहरी ( मध्याह्न ) छायारहित होती है । श्रावण से पौष तक मध्यान्ह में दो अङ्गुल छाया अधिक रहती है, और फिर माघ से ज्येष्ठ तक दो अङ्गुल कम हो जाती है ।

(३) पन्द्रह दिन-रात का एक पक्ष होता है । जिस पक्ष में चन्द्रमा बढ़ता रहता है उसे शुक्लपक्ष और जिस पक्ष में चन्द्रमा घटता है उसे कृष्ण ( बहुल ) पक्ष कहते हैं ।

(४) दो पक्ष का एक महीना होता है । वेतन देने के लिए तीस दिन-रात का एक महीना माना जाता है । साढ़े तीस दिन-रात का एक सौर मास होता है । साढ़े उनतीस दिन-रात का एक चान्द्रमास होता है । सत्ताईस दिन-रात का एक नक्षत्र-मास होता है । बत्तीस दिन-रात का एक मलीमास होता है । पैंतीस दिन रात का महीना घोड़ों के सईसों को वेतन देने के उपयोग में लाया जाता है । हाथियों की सेवा में नियुक्ति कर्मचारियों का एक महीना, चालीस दिन-रात का होता है ।

(५) दो मास की एक ऋतु होती है । श्रावण-भादों में वर्षा ऋतु होती है । आश्विन-कार्तिक में शरद ऋतु होती है । मार्गशीर्ष-पौष में हेमन्त ऋतु होती है ।

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला) · पृष्ठ 267, कुल 918 में से · BharatKosha