भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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प्र० ३७ : अ० २१ ] शुल्क का अध्यक्ष १८७

(१) वैवाहिकमन्वायनमौपायनिकं यज्ञकृत्यप्रसवनैमित्तिकं देवेज्या-चौलोपनयनगोदानव्रतदक्षिणादिषु क्रियाविशेषेषु भाण्डमुच्छुल्कं गच्छेत् । (२) अन्यथावादिनः स्तेयदण्डः । (३) कृतशुल्केनाकृतशुल्कं निर्वाहयतो द्वितीयमेकमुद्रया भित्त्वा पण्यपुटमपहरतो वैदेहकस्य तच्च तावच्च दण्डः । (४) शुल्कस्थानाद्गोमयपलालं प्रमाणं कृत्वा अपहरत उत्तमः साहसदण्डः । (५) शस्त्रवर्मकवचलोहरथरत्नधान्यपशूनामन्यतमानिर्वाह्यं निर्वाहयतो यथावघुषितो दण्डः पण्यनाशश्च । (६) तेषामन्यतमस्यानयने बहिरेवोच्छुल्को विक्रयः । (७) अन्तपालः सपादपणिकां वर्तनीं गृह्णीयात् पण्यवहनस्य, पणिकामेकमुखरस्य, पशूनामर्धपणिकां, क्षुद्रपशूनां पादिकाम्, असभारस्य माषिकाम् । नष्टापहृतं च प्रतिविदध्यात् ।


( १ ) विवाहसंबंधी, विवाह में प्राप्त, सदावर्त्त या क्षेत्रों के लिये दिया गया दान, यज्ञकर्म एवं जन्मोत्सव के लिए भेजा हुआ देवपूजा, मुंडन, जनेऊ, गोदान और व्रत आदि धार्मिक कार्यों से संबद्ध माल पर चुंगी न ली जानी चाहिए ।

( २ ) किन्तु चुंगी के भय से जो व्यक्ति अपने माल का संबंध उक्त कार्यों से बताये तो उसे चोरी का दण्ड दिया जाय ।

( ३ ) यदि कोई व्यापारी चुंगी दिए माल के साथ बिना चुंगी दिए माल को निकाल ले जाय या इसी प्रकार बिना मुहर लगे माल को निकाल ले जाय, अथवा चुंगी दिए माल में बिना चुंगी का माल मिला दे, उस व्यापारी का वह बिना चुङ्गी का माल जब्त कर लिया जाय और उस पर उतना ही दण्ड निर्धारित किया जाय ।

( ४ ) जो व्यापारी चुङ्गी देने के भय से अपने अच्छे माल को घटिया बताकर धोखे से निकाल ले जाने की चेष्टा करे, उसे उत्तम साहस दण्ड दिया जाना चाहिए ।

( ५ ) शस्त्र, कवच, लोहा, रथ, रत्न, अन्न और पशु आदि किसी भी प्रतिबन्ध लगी वस्तु को लाने-ले जाने वाले व्यापारी को पूर्व निर्धारित दण्ड दिया जाय और उसकी उस वस्तु को जब्त कर लिया जाय ।

( ६ ) इनमें से कोई वस्तु यदि बाहर लायी जाये तो वह बिना चुङ्गी दिये भी नगर-सीमाओं के बाहर बेची जा सकती है ।

( ७ ) सीमा रक्षक अन्तपाल को चाहिए कि वह माल ढोने वाली प्रति गाड़ी से मार्गरक्षा-कर ( वर्त्तनी ) के रूप में १¼ पण कर वसूल करे । घोड़े, खच्चर, गधे आदि एक खुर वाले पशुओं की गाड़ी पर एक पण, बैल आदि पशुओं पर आधा पण, बकरी, भेड़ आदि छोटे पशुओं पर चौथाई पण और कंधे पर भार ढोने वाले व्यक्तियों पर एक माष ( तांबे का सिक्का ) कर लेना चाहिए । यदि किसी व्यापारी की कोई

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