कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ
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प्र० ३८ : अ० २२ ] कर वसूली के नियम १९१
(१) अतो नवपुराणानां देशजातिचरित्रतः । पण्यानां स्थापयेच्छुल्कमत्ययं चापकारतः ॥
इत्यध्यक्षप्रचारे द्वितीयेऽधिकरणे शुल्कव्यवहारो नाम द्वाविंशोऽध्यायः, आदितो द्विचत्वारिंशः ।
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( १ ) इसलिए राजा को चाहिए कि वह देश, जाति तथा आचार के अनुसार नये एवं पुराने हर पदार्थों पर कर की व्यवस्था करे, और उनमें जहाँ से नुकसान की सम्भावना हो, उसके लिए उचित दण्ड की व्यवस्था भी करे ।
अध्यक्षप्रचार नामक द्वितीय अधिकरण में शुल्कव्यवहार नामक बाइसवाँ अध्याय समाप्त ।
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