भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

पृष्ठ 289, कुल 918 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 289
प्रकरण ४२सूनाध्यक्षः
अध्याय २६

(१) सूनाध्यक्षः प्रदिष्टभयानामभयवनवासिनां च मृगपशुपक्षि-मत्स्यानां बन्धवधहिंसायामुत्तमं दण्डं कारयेत् । कुटुम्बिनामभयवनपरि-ग्रहेषु मध्यमम् । (२) अप्रवृत्तवधानां मत्स्यपक्षिणां बन्धवधहिंसायां पादोनसप्तविंशति-पणमत्ययं कुर्यात्, मृगपशूनां द्विगुणम् । (३) प्रवृत्तहिंसानामपरिगृहीतानां षड्भागं गृह्णीयात् । मत्स्यपक्षिणां दशभागं वाधिकं, मृगपशूनां शुल्कं वाधिकम् । (४) पक्षिमृगाणां जीवत्षड्भागमभयवनेषु प्रमुञ्चेत् । (५) सामुद्रहस्त्यश्वपुरुषवृषभगर्धभाकृतयो मत्स्याः सारसा नादेयास्त-टाककुल्योद्भूवा वा, क्रौञ्चोत्क्रोशकदात्यूहहंसचक्रवाकजीवञ्जीवकभृङ्ग-


वधस्थान का अध्यक्ष

( १ ) सरकारी जंगलों या ऋषियों के आश्रमों में रहनेवाले ऐसे मृग, गेंडा, भैंसा, मोर तथा मछलियां, जिनको मारने-पकड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया है, कोई भी व्यक्ति उनको मारे, पकड़े या क्षति पहुँचाये तो सून ( वधस्थान ) का अध्यक्ष उसे उत्तम साहस दण्ड दिलवाये । कोई राजपरिवार के व्यक्ति इस आज्ञा का उल्लंघन करें तो उन्हें मध्यम साहस दण्ड देना चाहिए ।

( २ ) पक्षी और मछली जैसे अहिंसक प्राणियों को पकड़ने, प्रहार करने या मारनेवाले व्यक्ति को पौने सत्ताईस पण का दण्ड दिया जाय । जो व्यक्ति मृग और पशुओं का वध करे उसको दुगुना ( साढ़े तिरपन पण ) दण्ड दिया जाय ।

( ३ ) जो हिंसक जानवर हों, जिनका कोई मालिक न हो, जो सरकारी जंगलों या ऋषि-आश्रमों के न हों, उनका जो शिकार करे उससे सूनाध्यक्ष छठा हिस्सा सरकारी टैक्स के रूप में ले ले । इसी प्रकार मछली तथा पक्षियों का दसवां हिस्सा या उससे कुछ अधिक और मृग आदि, पशुओं का भी दशवां हिस्सा या उससे कुछ अधिक राजभाग ले लेना चाहिए ।

( ४ ) अरक्षित जङ्गलों से पकड़े हुए पक्षी और मृग आदि का छठा भाग लेकर उन्हें सरकारी जङ्गलों में छोड़ देना चाहिए ।

( ५ ) समुद्र में पैदा होने वाले; हाथी, घोड़े, पुरुष, बैल, गधा आदि की आकृति वाले, मत्स्य, सारस आदि जलचर प्राणी; तालाबों, झीलों, नदियों एवं नहरों में पैदा होने वाली मछलियाँ, क्रोंच, टिटहरी, जलकौवा, हंस, चक्रवाक, जीवंजीवक,