भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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२१०कौटिल्य का अर्थशास्त्र[ दूसरा अधिकरण

(१) पुरुषं घ्नन्त्याश्चिताप्रतापोऽप्सु प्रवेशनं वा । (२) गणिकाभरणमर्थं भोगं वापहरतोऽष्टगुणो दण्डः। गणिका भोगमार्यतिं पुरुषं च निवेदयेत् । (३) एतेन नटनर्तकगायकवादकवाग्जीवनकुशीलवप्लवकसौभिकचा-रणस्त्रीव्यवहारिणां स्त्रियो गूढाजीवाश्च व्याख्याताः। (४) तेषां तूर्यमागन्तुकं पञ्चपणं प्रेक्षावेतनं दद्यात् । (५) रूपाजीवा भोगद्वयगुणं मासं दद्युः । (६) गीतवाद्यपाठ्यनृत्तनाट्याक्षरचित्रवीणावेणुमृदङ्गपरचितज्ञानग-न्धमाल्यव्यूहनसम्पादनसंवाहनवैशिककलाज्ञानानि गणिका दासी रङ्गोप-जीविनीश्च ग्राहयतो राजमण्डलादाजीवं कुर्यात् ।

के कारण गणिका यदि संभोग कराने को तैयार न हो तो उसे अपराधिनी न समझा जाय ।

(१) यदि कोई गणिका संभोग-शुल्क लेकर किसी पुरुष को मरवा डाले तो गणिका को उस पुरुष के साथ जीवित ही चिता में जला देना चाहिए, अथवा उसके गले में पत्थर बाँधकर उसको पानी में डुबो देना चाहिए ।

(२) यदि कोई पुरुष किसी गणिका के वस्त्र, आभरण या संभोग से प्राप्त धन को चुरा ले तो उसे उस धन का आठ गुना दण्ड दिया जाय । गणिका को चाहिए कि वह अपने संभोग, अपनी आमदनी और अपने साथ रहनेवाले पुरुष की सूचना गणि-काध्यक्ष को बराबर देती रहे ।

(३) यही दण्ड-विधान और यही व्यवस्था उन लोगों के लिये भी है जो नट, नर्तक, गायक, वादक, कथावाचक, कुशीलव, प्लवक, जादूगर, चारण हैं तथा जो कोई भी स्त्रियों द्वारा जीविका-निर्वाह करते हैं, और वे स्त्रियाँ जो छिपकर व्यभिचार करती हैं ।

(४) बाहर से आई हुई नट-मण्डली प्रत्येक खेल पर पाँच पण राजकर के रूप में अदा करे ।

(५) रूप से जीविका कमाने वाली वेश्या अपनी मासिक आमदनी के हिसाब से दो दिन की कमाई कर रूप में राजा को दे ।

(६) गाना, बजाना, नाचना, नाटक करना, लिखना, चित्रकारी करना, वीणावेणु-मृदंग बजाना, दूसरे के मन को पहिचानना, सुगन्धित द्रव्यों को बनाना, माला गूंथना, पैर दबाना, शरीर सजाना आदि कार्यों में निपुण लोगों की और गणिका, दासी तथा नर्तकियों को कलाओं का ज्ञान देने वाले आचार्यों की, आजी-विका का प्रबन्ध नगरों तथा गाँवों से आने वाली आय द्वारा किया जाना चाहिए ।