कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्र० ४५ : अ० २६ ] पशुविभाग का अध्यक्ष २१९
(१) समव्यूढतीर्थमकदमग्राहमुदकमवतारयेयुः पालयेयुश्च । स्तेनव्यालसर्पग्राहगृहीतं व्याधिजरावासन्नं च आवेदयेयुरन्यथा रूपमूल्यं भजेरन् । (२) कारणमृतस्याङ्कचर्म गोमहिषस्य कर्णलक्षणमजाविकानां पुच्छमङ्कचर्म चाश्वखरोष्ट्राणां बालचर्मबस्तिपित्तस्नायुदन्तखुरशृङ्गास्थीनि चाहरेयुः । (३) मांसमाममार्द्रं शुष्कं वा विक्रीणीयुः । उदश्वित् श्ववराहेभ्यो दद्युः । कूर्चिकां सेनाभक्तार्थमाहरेयुः । किलाटो घाणपिण्याकक्लेदार्थः । (४) पशुविक्रेता पादिकं रूपं दद्यात् । (५) वर्षाशरद्धेमन्तानुभयतः कालं दुह्युः । शिशिरवसन्तग्रीष्मानेककालम् । द्वितीयकाले दोग्धुरङ्गुष्ठच्छेदो दण्डः । (६) दोहनकालमतिक्रामतस्तत्फलहानं दण्डः ।
( १ ) पशुओं को पानी पिलाने एवं नहलाने के लिए ऐसे स्थान में उतारना चाहिए, जहाँ चौरस घाट बने हों और दलदल एवं हिंसक जलचर जन्तु दोनों न हों; गोपालक पूरी सावधानी से उनकी रक्षा करता रहे । गोपालकों का कर्तव्य है कि वे चोर, व्याघ्र, साँप एवं नक्र आदि से आक्रान्त और बीमारी तथा बुढ़ापे से मरे हुए पशुओं की सूचना अध्यक्ष को दें, अन्यथा मृतपशु के नुकसान का दायित्व उन पर समझा जायगा ।
( २ ) यदि भैंस मर गई हो तो उसका दगा हुआ चमड़ा; बकरी तथा भेड़ के चिह्नित कान; और घोड़ा, गधा एवं ऊँट की पूँछ लाकर ग्वाला, अध्यक्ष के सामने पेश करे; साथ ही वह मरे हुए पशु के बाल, चमड़ा, मूत्राशय, पित्ता, आँत, दाँत, खुर, सींग और हड्डी, इन सब चीजों का संग्रह करके रख ले ।
( ३ ) गीले या सूखे मांस को बेच देना चाहिए । मठा को कुत्तों और सूअरों में वितरित कर देना चाहिए । काञ्जी को सैनिकों के लिए देनी चाहिए । फटे हुए दूध को गाय भैंसों की सानी में डाल देना चाहिए ।
( ४ ) पशुओं का व्यापारी प्रत्येक पशु के पीछे, उसकी लागत का चतुर्थांश अध्यक्ष को दे ।
( ५ ) ग्वालों को चाहिए कि वे सावन, भादों, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष और पौष महीनों में गाय-भैसों को दो समय दुहें । माघ, फाल्गुन, चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, और आषाढ़ में केवल सायंकाल ही दुहें ।
( ६ ) इन छह महीनों में गाय-भैसों को दोनों समय दुहने वाले व्यक्ति का अंगूठा काट देना चाहिए । जो ग्वाला ठीक समय पर न दुहे, उसे उस दिन का वेतन न दिया जाय ।