भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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२४८ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ दूसरा अधिकरण

(१) पुण्यस्थानोदकस्थानदेवगृहराजपरिग्रहेषु पणोत्तरा विष्ठादण्डाः । मूत्रेष्वर्धदण्डाः । (२) भैषज्यव्याधिभयनिमित्तमदण्ड्याः । (३) मार्जारश्वनकुलसर्पप्रेतानां नगरस्यान्तरुत्सर्गे त्रिपणो दण्डः । खरोष्ट्राश्वतरशवपशुप्रेतानां षट्पणः । मनुष्यप्रेतानां पञ्चाशतपणः । (४) मार्गविपर्यासे शवद्वारादन्यतः शवनिर्णयने पूर्वः साहसदण्डः । द्वाःस्थानां द्विशतम् । श्मशानादन्यत्र न्यासे दहने च द्वादशपणो दण्डः । (५) विषण्नालिकमुभयतोरात्रं यामतूर्यम् । तूर्यशब्दे राज्ञो गृहाभ्याशे सपादपणमक्षणताडनं प्रथमपश्चिमयामिकम् । मध्यमयामिकं द्विगुणम् । बहिश्चतुर्गुणम् ।

(१) राजमार्ग पर मल-त्याग करने वालों को एक पण, पवित्र तीर्थस्थानों पर मल-त्याग करने वालों को दो पण, जलाशयों पर मल-त्याग करने वालों पर तीन पण, देवालय में मल-त्याग करने वालों पर चार पण और खजाना, कोष्ठागार आदि स्थानों पर मलत्याग करनेवाले व्यक्तियों पर पाँच पण दण्ड किया जाना चाहिए । इन्हीं स्थानों में यदि कोई व्यक्ति पेशाब करे तो उस पर इसका आधा दण्ड किया जाना चाहिए ।

(२) यदि जुलाब लेने के कारण या अतिसार, प्रमेह आदि बीमारियों के कारण अथवा किसी डर से, उक्त स्थानों में कोई व्यक्ति मल-मूत्र-त्याग करे तो उसे दण्ड नहीं देना चाहिए ।

(३) मरे हुये बिल्ली, कुत्ता, नेवला और साँप को यदि कोई व्यक्ति नगर के पास या नगर के बीच में डाल आवे तो उस पर तीन पण दण्ड दिया जाना चाहिए । यदि गधा, ऊँट, खच्चर तथा घोड़ा आदि को इस प्रकार छोड़ दिया जाय तो छोड़ने वाले को छह पण दण्ड दिया जाय । मनुष्य की लाश इस प्रकार छोड़ी जाने पर पचास पण दण्ड दिया जाना चाहिए ।

(४) मुर्दों को ले जाने के लिए जो रास्ता नियत है उसको छोड़ कर और जो द्वार नियत है, उसको छोड़कर दूसरी ही ओर से मुर्दा ले जाने वालों को प्रथम साहस दण्ड दिया जाना चाहिए । द्वार का रक्षक पुरुष यदि उन मुर्दा ले जाने वालों को न रोके तो उसे दो-सौ पण दण्ड दिया जाना चाहिए । श्मशान भूमि के अन्यत्र मुर्दा जलाने और गाड़ने वालों पर बारह पण दण्ड करना चाहिए ।

(५) रात की पहिली छह घड़ी बीत जाने पर और रात के अन्तिम छह घड़ी बाकी रह जाने पर, दोनों समय भोंपू देना चाहिये । उस रात्रि-घोष के बीच यदि कोई व्यक्ति राजमहल के पास गुजरता हुआ दिखाई दे तो उसे सवा पण दण्ड दिया जाना चाहिए । जो व्यक्ति रात्रिघोष के ठीक मध्यकाल में आता-जाता पकड़ा जाय, उसे ढाई पण दण्ड देना चाहिए । यदि कोई व्यक्ति नगर के बाहर इस प्रकार आता-जाता पकड़ा जाये तो उस पर पाँच दण्ड कर देना चाहिए ।