कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्र० ५८ : अ० २ ] विवाह सम्बन्ध ( १ ) २६३
(१) मृते भर्तरि धर्मकामा तदानीमेवास्थाप्याभरणं शुल्कशेषं च लभेत । लब्ध्वा वा विन्दमाना सवृद्धिकमुभयं दाप्येत । कुटुम्बकामा तु श्वशुरपतिदत्तं निवेशकाले लभेत । निवेशकालं हि दीर्घप्रवासे व्याख्यास्यामः । (२) श्वशुरप्रातिलोम्येन वा निविष्टा श्वशुरपतिदत्तं जीयेत । ज्ञातिहस्तादभिमृष्टाया ज्ञातयो यथागृहीतं दद्युः । (३) न्यायोपगतायाः प्रतिपत्ता स्त्रीधनं गोपायेत् । (४) पतिदायं विन्दमाना जीयेत । धर्मकामा भुञ्जीत । (५) पुत्रवती विन्दमाना स्त्रीधनं जीयेत । तत्तु स्त्रीधनं पुत्रा हरेयुः । (६) पुत्रभरणार्थं वा विन्दमाना पुत्रार्थं स्फातीकुर्यात् ।
राक्षस तथा पैशाच विधि से विवाह किया हो ऐसे पति-पत्नी यदि स्त्री धन को खर्च कर डालें तो उन्हें चोरी का दण्ड दिया जाय । यहाँ तक विवाह धर्म का निरूपण किया गया है ।
( १ ) स्त्री को पुनर्विवाह का अधिकार : पति के मर जाने पर स्त्री यदि अपने धर्म-कर्म पर रहना चाहती हो तो उसे अपने दोनों प्रकार के निजी धन तथा प्रीति धन ले लेना चाहिए । उस धन को ले लेने के बाद यदि वह दूसरा पति कर ले तो ब्याज सहित सारे मूलधन को वह वापिस कर दे । यदि वह परिवार की इच्छा से दूसरा विवाह करना चाहती हो तो अपने मृत पति और श्वसुर के दिए हुए धन को विवाह के समय में ही पा सकती है, उसके पहिले नहीं । इस प्रकार के पुनर्विवाह का विस्तृत विवेचन आगे दीर्घप्रवास प्रकरण में किया जाएगा ।
( २ ) यदि विधवा स्त्री अपने ससुर की इच्छा के विरुद्ध पुनर्विवाह करना चाहे तो ससुर और मृत-पति का धन उसे नहीं मिलेगा । यदि विरादरी वालों के हाथ से उसके पुनर्विवाह का प्रबन्ध हो तो विरादरी वाले ही उसके लिये हुए धन को वापिस करें ।
( ३ ) न्यायपूर्वक प्राप्त हुई स्त्री की रक्षा करने वाला पुरुष ही उसके धन की भी रक्षा करे । पुनर्विवाह की इच्छा करने वाली स्त्री अपने मृत पति के उत्तराधिकार को नहीं पा सकती है ।
( ४ ) यदि वह धर्मपूर्वक जीवन-निर्वाह करने की इच्छा करे तो वह अपने मृत पति के उत्तराधिकार को भोग सकती है ।
( ५ ) यदि पुत्रवती स्त्री पुनर्विवाह करना चाहे तो वह निजी स्त्रीधन की अधिकारिणी नहीं हो सकती । उस स्त्री के निजी धन के उत्तराधिकारी उसके पुत्र ही होंगे ।
( ६ ) यदि कोई विधवा स्त्री अपने पुत्रों के भरण-पोषण के लिए पुनर्विवाह करना चाहे तो उसे अपनी निजी सम्पत्ति अपने लड़कों के नामजद कर देनी पड़ेगी ।