भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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प्र० ५६ : अ० ३ ] विवाह सम्बन्ध ( २ ) २६९

ग्राममध्ये चण्डालः पक्षान्तरे पञ्चशिफा दद्यात् । पणिकं वा प्रहारं मोक्षयेत् । इत्यतिचारः ।

(१) प्रतिषिद्धयोः स्त्रीपुंसयोरन्योन्योपकारे क्षुद्रकद्रव्याणां द्वादशपणो दण्डः, स्थूलकद्रव्याणां चतुर्विंशतिपणः, हिरण्यसुवर्णयोश्चतुष्पञ्चाशतपणः स्त्रिया दण्डः, पुंसो द्विगुणः । त एवागम्ययोरर्धदण्डाः ।

(२) तथा प्रतिषिद्धपुरुषव्यवहारेषु च । इति प्रतिषेधः ।

(३) राजद्विष्टातिचाराभ्यामात्मापक्रमणेन च । स्त्रीधनानीतशुल्कानामस्वाम्यं जायते स्त्रियाः ॥

इति धर्मस्थीये तृतीयेऽधिकरणे विवाहसंयुक्तप्रकरणे शुश्रूषा-भर्मंपाण्ड्य-अतिचार-उपकारव्यवहारप्रतिषेधो नाम तृतीयोऽध्यायः; आदित एकोनपञ्चाशः ।

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अङ्ग पर गाँव के चंडाल द्वारा पांच कोड़े लगवाये जाँय । पण दंड अदा करने पर प्रहार दंड कम कर दिया जाय । यहाँ तक अतिचार के विषय में कहा गया ।

( १ ) अतिचार पर प्रतिषेध : वर्जित करने पर यदि कोई स्त्री तथा पुरुष छोटी-मोटी उपहार की वस्तुऐं देकर परस्पर व्यवहार करें तो छोटे उपहार पर स्त्री को बारह पण और बड़े उपहार पर चौबीस पण दण्ड दिया जाय । यदि उपहार में वह सोने की कीमती चीजें दे तो उसे चौबीस पण का दण्ड दिया जाय । इन अपराधों को यदि पुरुष करे तो उस पर स्त्री से दुगुना दण्ड किया जाय । यदि वे स्त्री-पुरुष बिना मुलाकात किए ही उपहार की चीजें लेते-देते रहें तो पूर्वोक्त दण्ड से आधा दण्ड उन्हें दिया जाय ।

( २ ) इसी प्रकार निषिद्ध पुरुषों के सम्बन्ध में भी दण्ड आदि का नियम समझना चाहिए । यहाँ तक प्रतिषेध के विषय में कहा गया ।

( ३ ) राज्य के प्रति बगावत करने पर, आचार का उल्लंघन करने पर और आवारा-गर्द होने पर कोई भी स्त्री अपना स्त्री धन, दूसरी शादी करने पर निर्वाह के लिए प्राप्त हुआ धन ( आनीत ) और दहेज में मिला हुआ धन; आदि की अधिकारिणी नहीं हो सकती ।

धर्मस्थीय नामक तृतीय अधिकरण में तीसरा अध्याय समाप्त ।

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