कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२७६ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ तीसरा अधिकरण
(१) रिक्थं पुत्रवतः पुत्रा दुहितरो वा धर्मिष्ठेषु विवाहेषु जाताः । तदभावे पिता धरमाणः, पित्रभावे भ्रातरो भ्रातृपुत्राश्च । (२) अपितृका बहवोऽपि च भ्रातरो भ्रातृपुत्राश्च पितुरेकमंशं हरेयुः । (३) सोदर्याणामनेकपितृकाणां पितृतो दायविभागः । (४) पितृभ्रातृपुत्राणां पूर्वे विद्यमाने नापरमवलम्बन्ते, ज्येष्ठे च कनिष्ठमर्थग्राहिणः । (५) जीवद्विभागे पिता नैकं विशेषयेत् । न चैकमकारणान्निर्विभजेत । पितुरसत्यर्थे ज्येष्ठाः कनिष्ठाननुगृह्णीयुः, अन्यत्र मिथ्यावृत्तेभ्यः । (६) प्राप्तव्यवहाराणां विभागः । अप्राप्तव्यवहाराणां देयविशुद्धं मातृबन्धुषु ग्रामवृद्धेषु वा स्थापयेयुर्व्यवहारप्रापणात्; प्रोषितस्य वा ।
( १ ) सुवर्ण, आभूषण एवं नकदी आदि जो भी रिक्थ धन है उसके अधिकारी लड़के हैं, लड़कों के अभाव में वे लड़कियाँ रिक्थ धन की अधिकारिणी हैं, जो धर्म-विवाहों से पैदा हुई हैं। लड़कियों के अभाव में मृतक पुरुष का जीवित पिता, पिता के अभाव में पिता के सगे भाई, और उनके अभाव में भी उनके पुत्र उस संपत्ति के हकदार हैं।
( २ ) मृतक पिता के यदि बहुत-से भाई और उन भाइयों के भी कई पुत्र हों तो वे पिता की संपत्ति का बराबर बँटवारा करें।
( ३ ) एक ही माता से अनेक पिताओं द्वारा पैदा हुए लड़कों का दाय-विभाग पिता के क्रम से होना चाहिए।
( ४ ) मृतक के भाइयों के पुत्रों में यदि उनका पिता जीवित हो और कुटुम्ब के भरण-पोषण के लिए कर्जा लिया हो तो उस कर्जे को वही चुकता करे, उसके अभाव में बड़ा पुत्र और उसके अभाव में छोटा पुत्र कर्जा अदा करे।
( ५ ) पिता अपने जीते-जी यदि अपनी संपत्ति का बँटवारा करना चाहे तो वह किसी एक पुत्र को अधिक हिस्सा न दे। उसे चाहिए कि अकारण ही किसी लड़के को वह हिस्सेदारी से वंचित न करे। पिता अपने पीछे यदि कुछ भी संपत्ति न छोड़ जाय तो बड़े भाई को चाहिए कि वह छोटे भाइयों का भरण-पोषण करे, किन्तु छोटे भाई यदि आचार-व्यवहार-भ्रष्ट हो जाँय तो उसकी रक्षा के दायित्व से अपने को वह बरी समझे।
( ६ ) पुत्रों के बालिग (प्राप्तव्यवहार) हो जाने पर ही संपत्ति का बँटवारा करना चाहिए। नाबालिग (अप्राप्तव्यवहार) पुत्र जब तक बालिग न हो जाँय और विदेश गए पुत्र जब तक वापिस न लौट आएँ तब तक उनके हिस्से की सम्पत्ति को उनके माता या गाँव के किसी वृद्ध विश्वासी पुरुष के पास सुरक्षित रख देना चाहिए।