भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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२९० कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ तीसरा अधिकरण

सरतः प्रतिक्रुष्टो विक्रीणीत । प्रतिक्रुष्टातिक्रमे वास्तुनि द्विशतो दण्डः, अन्यत्र चतुर्विंशतिपणो दण्डः । इति वास्तुविक्रयः । (१) सीमविवादं ग्रामयोरुभयोः सामन्ता पञ्चग्रामी दशग्रामी वा सेतुभिः स्थावरैः कृत्रिमैर्वा कुर्यात् । (२) कर्षकगोपालवृद्धकाः पूर्वभुक्तिका वा, अबाह्याः सेतुनामभिज्ञा बहव एको वा निर्दिश्य सीमसेतून् विपरीतवेषाः सीमानं नयेयुः । उद्दिष्टानां सेतुनामदर्शने सहस्रदण्डः । तदेव नीते सीमापहारिणां सेतुच्छिदां च कुर्यात् । (३) प्रनष्टसेतुभोगं वा सीमानं राजा यथोपकारं विभजेत् । (४) क्षेत्रविवादं सामन्तग्रामवृद्धाः कुर्युः । तेषां द्वैधीभावे यतो बहवः शुचयोऽनुमता वा ततो नियच्छेयुः । मध्यं वा गृह्णीयुः । तदुभयं परोक्तं वास्तु राजा हरेत् प्रनष्टस्वामिकं च । यथोपकारं वा विभजेत् ।


मकान मालिक उपस्थित न हो तो उसकी अनुपस्थिति में ही नीलाम करने वाला मकान बेच दे । बोली बोल देने के बाद यदि कोई व्यक्ति मकान लेने से मुकर जाय तो उस पर दो-सौ पण दण्ड किया जाय । मकान के अतिरिक्त अन्य वस्तुओं के सम्बन्ध में चौबीस पण दण्ड किया जाय । यहाँ तक मकान बेचने के सम्बन्ध में कहा गया ।

( १ ) सीमा-विवाद—दो गाँवों के झगड़ों को उन गाँवों के मुखिया या आस-पास के पाँच-पाँच, दस-दस गाँवों के मुखिया आपस में मिलकर निबटायें; दो गाँवों के बीच वे स्थायी या अस्थायी हदबन्दी कायम कर दें ।

( २ ) गाँव के किसान, ग्वाले, वृद्ध तथा बाहर के अन्य अनुभवी, एक या अनेक पुरुष, जो शरहद की ठयेबन्दी से परिचित न हों, अपना वेश बदल कर वे सीमा के चिह्नों का पता लगायें और तब सीमाएँ निर्धारित करें । निर्णय किये हुए या बताये गए सीमा-चिह्नों के न देखे जाने पर अपराधी पर एक हजार पण दण्ड किया जाय । जो सीमा की भूमि का अपहरण करे या उसके चिह्नों को काटे, उसे भी यही दण्ड दिया जाय ।

( ३ ) जहाँ पर कि सीमा के चिह्न सर्वथा मिट गए हों और निर्णय के लिए कोई आधार नजर न आये, वहाँ पर राजा स्वयं इस प्रकार का सीमा-विभाग करे, जिससे कि किसी भी ग्रामवासी को कोई हानि न उठानी पड़े ।

( ४ ) खेतों की सीमाएँ—खेतों के झगड़े का निबटारा गाँव के मुखिया तथा वृद्ध पुरुष करें । यदि उनका आपस में मतभेद हो जाय तो वे धार्मिक पुरुष उसका निर्णय करें, जिनको प्रजा स्वीकार करती हो या किसी दूसरे को मध्यस्थ बना कर निर्णय किया जाय । यदि इन दोनों अवस्थाओं में भी कुछ निर्णय न हो सके तो उन विवादग्रस्त खेतों को राजा अपने कब्जे में ले ले और उस सम्पत्ति को भी राजा ले