कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें| २९२ | कौटिल्य का अर्थशास्त्र | [ तीसरा अधिकरण |
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(१) पश्चान्निविष्टमधरतटाकं नोपरितटाकस्य केदारमुदकेनाप्लावयेत् । उपरि निविष्टं नाधरतटाकस्य पूरस्स्रावं वारयेद् अन्यत्र त्रिवर्षोपरतकर्मणः । तस्यातिक्रमे पूर्वः साहसदण्डस्तटाकवामनं च । (२) पञ्चवर्षोपरतकर्मणः सेतुबन्धस्य स्वाम्यं लुप्येतान्यत्रापद्भ्यः । (३) तटाकसेतुबन्धानां नवप्रवर्तने पाञ्चवार्षिकः परिहारः । भग्नोत्सृष्टानां चातुर्वार्षिकः समुपारूढानां त्रैवार्षिकः । स्थलस्य द्वैवार्षिकः । स्वातमाधाने विक्रये च । (४) खातप्रावृत्तिमन्नदीनिबन्धायतनतटाककेदारारामषण्डवापानां सस्यवर्णभागोत्तरिकम्, अन्येभ्यो वा यथोपकारं दद्युः । (५) प्रक्रयाविक्रयाधिभागभोगनिसृष्टोपभोक्तारश्चैषां प्रतिकुर्युः । अप्रतीकारे हीनद्विगुणो दण्डः ।
( १ ) बाद में बने हुए नीचे के तालाब से सींचे जाने वाले खेत को ऊपर के तालाब के पानी से न सींचा जाय । नीचे के तालाब में आते हुए ऊपर के तालाब का पानी तब तक न रोका जाय, यदि नीचे का तालाब तीन वर्ष तक बेकार न पड़ा हो । इस नियम का उल्लंघन करने वाले को प्रथम साहस दण्ड दिया जाय और उसके तालाब का पानी निकलवा दिया जाय ।
( २ ) पाँच वर्ष तक यदि जल आदि का कोई सीमाबन्ध बेकार रहे उस दशा में उस पर उसके स्वामी का हक नहीं रहता है; किन्तु विपत्तियों के कारण यदि उसको उपयोग में न लाया गया हो तो कोई बात नहीं ।
( ३ ) कर की छूट—नये शिरे से तालाब और सीमाबन्ध बनवाने वाले व्यक्ति पर पाँच वर्ष तक सरकारी टैक्स न लगाया जाय । यदि वह जीर्णोद्धार कराये तो चार वर्ष तक; यदि उनको बढ़ाये तो तीन वर्ष तक सरकारी टैक्स न लिया जाय । इसी प्रकार भूमि को गिरवी रखने और बेचने पर दो वर्ष तक सरकारी टैक्स न लिया जाय ।
( ४ ) जिन तालाबों में नदी का पानी न आता हो और किसान रहट आदि लगाकर अपने खेतों, बगीचों तथा फुलवाड़ियों में से पानी देते हों उनकी उपज पर सरकार उतना ही कर लगाये जितने से उन लोगों को कोई कष्ट न हो ।
( ५ ) जिन किसानों के तालाब नहीं हैं वे भी कीमत देकर, कुछ बंधी हुई रकम देकर, अपनी उपज का कुछ हिस्सा देकर अथवा मालिक की आज्ञा से दूसरे तालाबों से पानी ले सकते हैं । किन्तु उनके लिए यह आवश्यक है कि वे तालाब, रहट आदि की बराबर मरम्मत करते रहें । मरम्मत न करने पर जो नुकसान होगा उसका दुगुना जुर्म उन्हें भुगतना पड़ेगा ।