भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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३०८ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ तीसरा अधिकरण

(१) देशकालातिपातने वा परिहीणं संप्रदानकालिकेन अर्धेण मूल्य-मुदयं च दद्युः। (२) यथासम्भाषितं वा विक्रीणाना नोभयमधिगच्छेयुः। मूल्यमेव दद्युः। अर्घपतने वा परिहीणं यथापरिहीणं मूल्यमूनं दद्युः। (३) सांव्यवहारिकेषु वा प्रात्ययिकेष्वराजवाच्येषु श्रेष्ठोपनिपाताभ्यां नष्टं विनष्टं वा मूल्यमपि न दद्युः। देशकालान्तरितानां तु पण्यानां क्षय-व्ययविशुद्धं मूल्यमुदयं च दद्युः। पण्यसमवायानां च प्रत्यंशम्। शेषमुप-निधिना व्याख्यातम्। एतेन वैयापृत्यविक्रयो व्याख्यातः। (४) निक्षेपश्चोपनिधिना। तमन्येन निक्षिप्तमन्यस्यार्पयतो हीयेत। निक्षेपापहारे पूर्वापदानं निक्षेप्तारश्च प्रमाणम्।


हुए थोक व्यापारियों को यथोचित मूल्य और ब्याज दें। शेष नियम उपनिधि के समान हैं।

(१) यदि देश, काल के अनुसार पहिले खरीद कर रखी हुई वस्तुओं का मूल्य गिर जाय तो वर्तमान में दिए जाने वाले मूल्य के अनुसार ही उसका मूल्य और ब्याज थोक व्यापारियों को दिया जाय।

(२) यदि थोक व्यापारियों का बड़े व्यापारियों के साथ यह तय हो चुका हो कि वे किसी नियत मूल्य पर ही माल बेचेंगे तो उसी मूल्य पर बेचते हुए छोटे व्यापारी, बड़े व्यापारियों को केवल मूल्य दें, ब्याज नहीं। यदि भाव गिर जाय तो उसी के अनुसार मूल्य दिया जाय।

(३) बिना कानूनी कार्यवाही के व्यावहारिक विश्वास पर होने वाले सौदे में यदि किसी प्रकार के दोष या आपत्ति के कारण खराबी आ जाय माल सर्वथा ही नष्ट हो जाय तो थोक व्यापारी उसका मूल्य न दें। किन्तु दूसरे स्थान और दूसरे समय में बेचे जाने वाले माल का छीजन (क्षय) और खर्च (व्यय) के हिसाब से उचित मूल्य और ब्याज दिया जाय। स्टेशनरी (पण्यसमवाय) में कुछ अंश छीजन का निकाल लिया जाय। इसके शेष नियम उपनिधि के समान समझने चाहिएँ। ये ही नियम फुटकर बिक्री के भी हैं।

(४) निक्षेप धन : निक्षेप, अर्थात् दिखाकर या गिनकर रखी जाने वाली धरोहर वस्तु के नियम उपनिधि के समान हैं। किसी के निक्षेप को यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे को दे दें, तो देने वाले को यथोचित दण्ड दिया जाय। निक्षेप रखने वाला व्यक्ति यदि उसे दबा दे या नष्ट कर दे तो पूर्वस्थिति की जाँच करके, इस सम्बन्ध में धरोहर रखने वाला (निक्षेप्ता) जैसी गवाही दे तदनुसार ही मामले का फैसला किया जाय।