कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें| प्रकरण ७६ |
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| अध्याय १९ |
दण्डपारुष्यम्
(१) दण्डपारुष्यं स्पर्शनमवगूर्णं प्रहतमिति । (२) नाभेरधःकायं हस्तपङ्कभस्मपांसुभिरिति स्पृशतस्त्रिपणो दण्डः । (३) तैरेवामेध्यैः पादष्ठीविकाभ्यां च षट्पणः । छर्दिमूत्रपुरीषादिभिर्द्वादशपणः नाभेरुपरि द्विगुणाः । शिरसि चतुर्गुणाः समेष्व । (४) विशिष्टेषु द्विगुणाः । हीनेषु अर्धदण्डाः । परस्त्रीषु द्विगुणाः । प्रमादमदमोहादिभिरर्धदण्डाः । (५) पाद्वस्त्रहस्तकेशावलम्बनेषु षट्पणोत्तरा दण्डाः । (६) पीडनावेष्टनाञ्जनप्रकर्षणाध्यासनेषु पूर्वः साहसद्ण्डः । पातयित्वाऽपक्रमतोऽर्धदण्डः ।
दण्डपारुष्य
( १ ) किसी को छूना, पीटना या हाथ उठाना और चोट पहुँचाना दंडपारुष्य है ।
( २ ) नाभि से नीचे के हिस्से पर हाथ, कीचड़, राख और धूल डालने वाले व्यक्ति को तीन पण दंड दिया जाय ।
( ३ ) यदि किसी को अपवित्र हाथ से छू दिया जाय, पैर से छू दिया जाय तो उस पर छह पण का दंड करना चाहिए । यही हरकतें यदि नाभि के ऊपर के हिस्से से की जांय तो उसे दुगुना दंड दिया जाय । यदि शिर पर की जांय तो चौगुना दंड दिया जाय ।
( ४ ) यदि अपने से श्रेष्ठ व्यक्तियों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाय तो उसे दुगुना दंड दिया जाय । अपने से छोटों के साथ यदि ऐसा व्यवहार किया जाय तो आधा दंड दिया जाय । दूसरों की स्त्रियों के साथ ऐसी हरकतें करने पर भी दुगुना दंड दिया जाय । यदि कोई व्यक्ति प्रमाद, उन्माद या अज्ञानतावश ऐसा करें तो उसे आधा दंड दिया जाय ।
( ५ ) पैर, वस्त्र, हाथ और बालों को पकड़ने वाले व्यक्ति पर क्रमशः छह, बारह, अठारह और चौबीस पण दंड दिया जाय ।
( ६ ) किसी को पकड़ने पर, बाँधने पर, कालिख पोतने पर, घसीटने पर और नीचे पटक उसके ऊपर चढ़ बैठने पर प्रथम साहस दंड दिया जाय । किसी को जमीन पर पटक कर भाग जाने वाले को प्रथम साहस का आधा दंड दिया जाय ।