भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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३७८ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ चौथा अधिकरण

(१) ब्राह्मणस्य सत्रिपरिग्रहः श्रुतवतस्तपस्विनश्च । तस्यातिक्रम उत्तमो दण्डः । कर्तुः कारयितुश्च कर्मणा व्यापादनेन च । (२) व्यावहारिकं कर्मचतुष्कम्–षड् दण्डाः, सप्त कशाः, द्वावुपरि निबन्धौ, उदकनालिका च । (३) परं पापकर्मणां नववेत्रलताद्वादशकं, द्वावूरुवेष्टौ, विंशतिर्नक्तमाललताः, द्वात्रिंशत्तलाः, द्वौ वृश्चिकबन्धौ, उल्लम्बने च द्वे, सूचीहस्तस्य, यवागूपीतस्याप्रस्रावः, एकपर्वदहनमंगुल्याः, स्नेहपीतस्य प्रतापनमेकमहः, शिशिररात्रौ बलबजाग्रशय्या चेत्यष्टादशकं कर्म । (४) तस्योपकरणं प्रमाणं प्रहरणं प्रधारणमवधारणं च खरपट्टादागमयेत् । (५) दिवसान्तरमेकैकं कर्म कारयेत् ।


और एक महीने से कम प्रसूता स्त्री को हर्गिज दण्ड न दिया जाय । पूर्वोक्त अपराधों में जो दण्ड पुरुषों के लिए कहे गए हैं उनका आधा दण्ड स्त्रियों को दिया जाय; अथवा उनको केवल वाग्दण्ड ( वाणी से ताडना ) ही दिया जाय ।

( १ ) ब्राह्मण, वेदज्ञ और तपस्वी को इतना मात्र दण्ड दिया जाय कि सिपाही उनको इधर-उधर दौड़ा-फिरा दे । जो लोग इन नियमों का उल्लङ्घन करें या कराये तथा अपराधी से काम करायें या उसको मारें, उनको उत्तम साहस दण्ड दिया जाय ।

( २ ) लोक व्यवहार में चार प्रकार के दंड प्रसिद्ध है: १. छह डंडे मारना, २. सात कोड़े मारना, ३. हाथ-पैर बाँधकर उलटा लटका देना और ४. नाक में नमक का पानी डालना ।

( ३ ) इनके अतिरिक्त पापाचारी पुरुषों के लिए इतने दण्ड और हैं : नौ हाथ-लम्बी बेंत से बारह बेंत लगाना; दोनों टांगों को बाँधकर करञ्ज की छड़ी से बीस छड़ी मारना; बत्तीस थप्पड़ मारना; बायें हाथ को पीछे बायें पैर से और दायें हाथ को पीछे दायें पैर से बाँधना; दोनों हाथ आपस में बाँधकर लटका देना; हाथ के नाखून में सूई चुभाना; लस्सी पिलाकर पेशाब न करने देना; अंगुली की एक पोर जला देना; घी पिलाकर पूरे दिन अग्नि या धूप में बैठाना; जाड़ों की रात में भीगी हुई खाट पर सुलाना; इस प्रकार कुल मिलाकर ये अठारह प्रकार के ( ४ + १४ ) दण्ड हुए ।

( ४ ) इस प्रकार के दण्डकर्म के लिए रस्सी, डंडे, कोड़े आदि की लम्बाई, दण्डनीय व्यक्ति को खड़ा आदि करने का तरीका और शरीर आदि के अनुकूल दण्ड-व्यवस्था आदि के संबंध में आचार्य खरपट्ट के दण्डशास्त्र-विषयक ग्रन्थ का अध्ययन करना चाहिए ।

( ५ ) कठिन शारीरिक श्रम के कार्यों को एक-एक दिन का अन्तर देकर कराया जाय ।