भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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प्रकरण ८४# सर्वाधिकरणरक्षणम्
अध्याय ९

(१) समाहर्तृप्रदेष्टारः पूर्वमध्यक्षाणामध्यक्षपुरुषाणां च नियमनं कुर्युः। (२) खनिसारकर्मान्तेभ्यः सारं रत्नं वापहरतः शुद्धवधः । (३) फल्गुद्रव्यकर्मान्तेभ्यः फल्गुद्रव्यमुपस्करं वा पूर्वः साहसदण्डः । (४) पण्यभूमिभ्यो राजपण्यं माषमूल्यादूर्ध्वमापादमूल्यादित्यपहरतो द्वादशपणो दण्डः । आ द्विपादमूल्यादिति चतुर्विंशतिपणः । आ त्रिपादमूल्यादिति षट्त्रिंशत्पणः । आ पणमूल्यादित्यष्टचत्वारिंशत्पणः । आ द्विपणमूल्यादिति पूर्वः साहसदण्डः । आ चतुष्पणमूल्यादिति मध्यमः । आ अष्टपणमूल्यादित्यत्तमः । आ दशपणमूल्यादिति वधः । (५) कोष्ठपण्यकुप्यायुधागारेभ्यः कुप्यभाण्डोपस्करापहारेष्वर्धमूल्येष्वेत एव दण्डाः ।


सरकारी विभागों और छोटे-बड़े कर्मचारियों की निगरानी

( १ ) समाहर्त्ता और प्रदेष्टा अधिकारियों को चाहिए कि पहिले वे विभागीय अध्यक्षों तथा उनके अधीनस्थ कर्मचारियों पर निगरानी रखें ।

( २ ) जो व्यक्ति खानों या कारखानों से हीरे-जवाहरात आदि बहुमूल्य वस्तुओं की चोरी करें उन्हें प्राणदण्ड दिया जाय ।

( ३ ) जो व्यक्ति सूत या लकड़ी के कारखानों से सारहीन वस्तुओं की चोरी करें उन्हें प्रथम साहस दण्ड दिया जाय ।

( ४ ) जो व्यक्ति राजकीय खेतों से एक माष से चार माष कीमत की जीरा, अजवायन आदि वस्तुओं को चुराये, उस पर बारह पण दण्ड किया जाय, और जो आठ माष कीमत तक की वस्तुओं को चुराये उस पर चौबीस पण दण्ड किया जाय । इसी प्रकार बारह माष तक की वस्तु चुराने पर छत्तीस पण और सोलह माष तक की चुराने पर अठतालीस पण दण्ड किया जाय । यदि दो पण मूल्य तक की वस्तु चुराये तो प्रथम साहस; चार पण मूल्य तक की चुराये तो मध्यम साहस, आठ पण मूल्य तक की चुराये तो उत्तम साहस और दस पण मूल्य तक की चुराये तो उसे प्राणदण्ड दिया जाय ।

( ५ ) जो व्यक्ति गोदाम से, दूकान से, कारखाने से या शस्त्रागार से आधा माष