कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्र० ८४ : अ० ६ ] राजकीय विभागों की निगरानी ३८१
(१) कोशभाण्डागाराक्षशालाभ्यश्चतुर्भागमूल्येष्वेव एव द्विगुणा दण्डाः।
(२) चोराणामभिप्रघर्षणे चित्रो घातः । इति राजपरिग्रहेषु व्याख्यातम् ।
(३) बाह्येषु तु प्रच्छन्नमहनि क्षेत्रखलवेश्मापणेभ्यः कुप्यभाण्डमुपस्करं वा माषमूल्यादूर्ध्वमापादमूल्यादित्यपहरतस्त्रिपणो दण्डः। गोमयप्रदेहेन वा प्रलिप्यावघोषणम् । आ द्विपादमूल्यादिति षट्पणः, गोमयभस्मना वा प्रलिप्यावघोषणम् । आ त्रिपादमूल्यादिति नवपणः, गोमयभस्मना वा प्रलिप्यावघोषणं, शरावमेखलया वा। आ पणमूल्यादिति द्वादशपणः, मुण्डनं प्रव्राजनं वा । आ द्विपणमूल्यादिति चतुर्विंशतिपणः, मुण्डस्येष्टका-शकलेन प्रव्राजनं वा । आ चतुष्पणमूल्यादिति षट्त्रिंशत्पणः । आ पञ्चपण-मूल्यादिति अष्टचत्वारिंशत्पणः । आ दशपणमूल्यादिति पूर्वः साहसदण्डः ।
कीमत से लेकर दो माष कीमत तक की धातुओं, उनसे बनी वस्तुओं और छीजन आदि की चोरी करे उस पर भी बारह पण दण्ड किया जाय ।
( १ ) जो व्यक्ति कोष, भांडागार और अक्षशाला से एक काकणी से लेकर एक माष मूल्य तक की वस्तुओं को चुराये उस पर चौबीस पण दण्ड दिया जाय ।
( २ ) जो कर्मचारी स्वयं चोरी कर चोरों का बहाना बतायें उन्हें कष्टकर प्राण-दण्ड दिया जाय । इस दण्ड के सम्बन्ध में आगे राजपरिग्रह नामक प्रकरण में विस्तार से कहा जायगा ।
( ३ ) राजकीय कर्मचारियों के अतिरिक्त कोई व्यक्ति यदि खेतों, खलिहानों, घरों और दूकानों से एक माष से चार माष मूल्य तक की वस्तुओं की दिन में चोरी करे तो उस पर तीन पण दण्ड किया जाय या उसकी देह पर गोबर लीपकर उसे सारे शहर में घुमाया जाय । आठ माष कीमत तक की वस्तुओं को चुराने पर छह पण दण्ड दिया जाय, अथवा गोबर की राख से उसका शरीर काला करके उसे शहर भर में घुमाया जाय । बारह माष मूल्य की वस्तुओं की चोरी करने पर नौ पण दण्ड किया जाय या उपले की राख से उसका शरीर काला करके उसे शहर में घुमाया जाय अथवा सकोरों की माला उसकी कमर या गले में डाल कर उसे शहर में घुमाया जाय । सोलह माष मूल्य की वस्तु की चोरी करने पर चोर को बारह पण दण्ड दिया जाय, या उसका शिर मुड़वा कर उसे देश-निकाला दिया जाय । बत्तीस माष की वस्तु चुराने वाले को चौबीस पण दण्ड दिया जाय, अथवा शिर मुड़ाकर पत्थर मारते हुए उसको देश से बाहर खदेड़ा जाय । दो पण ( ३२ माष ) कीमत की वस्तु चुराने वाले पर चौबीस पण दण्ड किया जाय, अथवा पहिले की तरह उसको देश से बाहर खदेड़ा जाय । चार पण कीमती वस्तु को चुराने वाले पर छत्तीस पण दण्ड किया