भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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३८४ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ चौथा अधिकरण

(१) चारकादभियुक्तं मुञ्चतो निष्पातयतो वा मध्यमः साहसदण्डः, अभियोगदानं च । बन्धनागारात्सर्वस्वं वधश्च ।
(२) बन्धनागाराध्यक्षस्य संरुद्धकमनाख्याय चारयतश्चतुर्विंशतिपणो दण्डः । कर्मकारयतो द्विगुणः स्थानान्तरत्वं गमयतोऽन्नपानं वा रुन्धतः षण्णवतिदण्डः । परिक्लेशयत उत्कोचयतो वा मध्यमः साहसदण्डः । घ्नतः साहस्रः ।
(३) परिगृहीतां दासीमाहितिकां वा संरुद्धिकामधिचरतः पूर्वः साहसदण्डः । चोरडामरिकभार्यां मध्यमः । संरुद्धिकामार्यामुत्तमः । संरुद्धस्य वा तत्रैव घातः । तदेवाध्यक्षेण गृहीतायार्यायां विद्यात् । दास्यां पूर्वः साहसदण्डः ।
(४) चारकमभित्त्वा निष्पातयतो मध्यमः । भित्त्वा वधः । बन्धनागारात्सर्वस्वं वधश्च ।


घूस लेकर घूमने, फिरने, पानी पीने, सोने, बैठने, खाने, पीने और मल-मूत्र त्यागने की स्वतंत्रता दे या दिलाये तो उस पर उत्तरोत्तर तीन पण अधिक दंड किया जाय ।

( १ ) यदि कोई राजपुरुष किसी अपराधी को हवालात से छोड़ दे या उसको प्रेरित करे, उसे मध्यम साहस दंड दिया जाय और साथ ही अपराधी को जितना देना था उसका भुगतान भी उसी राजपुरुष से किया जाय । यदि कोई प्रदेष्टा ऐसा करे तो उसकी सारी सम्पत्ति जब्त कर ली जाय और उसको प्राणदंड दिया जाय ।

( २ ) जेलर की आज्ञा के बिना यदि कैदी बाहर घूमे तो उस पर चौबीस पण दंड दिया जाय और ऐसा कराने वाले व्यक्ति पर अठतालीस पण दंड किया जाय । यदि कोई जेल का कर्मचारी कैदी की जगह बदले, उसके खानेपीने में बाधा डाले, उस पर छियानवे पण दंड, जो किसी कैदी को कोड़े मारे या रिश्वत दिलावे, उसको मध्यम साहस दंड और जो कोई कैदी का वध कर डाले उस पर एक हजार पण दंड किया जाय ।

( ३ ) खरीदी हुई या गिरवी रखी दासी यदि किसी कारण हवालात में बंद कर दी जाय और तब यदि कोई राजपुरुष उसके साथ व्यभिचार करे तो उसे प्रथम साहस दंड दिया जाय । चोर और अकस्मात् विनष्ट पुरुष ( डामरिक ) की पत्नी के साथ ऐसा ही दुर्व्यवहार करने वाले राजपुरुष को मध्यम साहस दंड, और कैद में बंद किसी आर्या स्त्री के साथ ऐसा करने पर उत्तम साहस दंड दिया जाय । यदि कोई कैदी ही ऐसा करे तो उसे प्राणदंड दिया जाय । सुवर्णाध्यक्ष यदि किसी कुलीन स्त्री के साथ दुराचार करे तो उसे भी प्राणदंड दिया जाय । दासी के साथ ऐसा करने पर प्रथम साहस दंड दिया जाय ।

( ४ ) यदि जेलखाने को बिना तोड़े ही कोई कैदी को बाहर निकाल दे तो उसे

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