भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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३९२ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ चौथा अधिकरण

(१) मेढ्रफलोपघातिनस्तदेव छेदयेत् । (२) जिह्वानासोपघाते सन्दंशवधः । (३) एते शास्त्रेष्वनुगताः क्लेशदण्डा महात्मनाम् । अक्लिष्टानां तु पापानां धर्म्यः शुद्धवधः स्मृतः ॥

इति कण्टकशोधने चतुर्थेऽधिकरणे शुद्धचित्रदण्डकल्पो नाम एकादशोऽध्यायः आदितोः सप्ताशीतितमः ।

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( १ ) यदि कोई व्यक्ति किसी का लिंग और अण्डकोश काट डाले उसका भी लिंग और अण्डकोश कटवा दिया जाय ।

( २ ) किसी की जीभ और नाक काट देने वाले व्यक्ति की कनिष्ठिका और अंगूठा कटवा दिया जाय ।

( ३ ) इस प्रकार के कठोर मृत्युदण्ड मनु आदि महात्माओं के धर्मशास्त्र विषयक ग्रन्थों में प्रतिपादित हैं । इनसे हल्के पापकर्मों के लिए शुद्ध प्राणदण्ड ही धर्मानुकूल समझना चाहिए ।

कण्टकशोधक नामक चतुर्थ अधिकरण में शुद्धचित्रदण्ड नामक ग्यारहवाँ अध्याय समाप्त ।

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