भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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पृष्ठ 484

४०० कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ चौथा अधिकरण

(१) शृङ्गिणा दंष्ट्रिणा वा हिंस्यमानममोक्षयतः स्वामिनः पूर्वः साहसदण्डः । प्रतिक्रुष्टस्य द्विगुणः । (२) शृङ्गिदंष्ट्रिभ्यामन्योन्यं घातयतस्तच्च तावच्च दण्डः । (३) देवपशुभृषभमुक्षाणं गोकुमारीं वा वाहयतः पञ्चशतो दण्डः । प्रवासयत उत्तमः । लोमदोहवाहनप्रजननोपकारिणां क्षुद्रपशूनामादाने तच्च तावच्च दण्डः । प्रवासने च, अन्यत्र देवपितृकार्येभ्यः । (४) छिन्ननस्यं भग्नयुगं तिर्यक्प्रतिमुखागतं च प्रत्यासरद्वा चक्रयुक्तं यानपशुमनुष्यसम्बाधे वा हिंसायामदण्ड्यः । अन्यथा यथोक्तं मानुषप्राणि-हिंसायां दण्डमभ्यावहेत् । अमानुषप्राणिवधे प्राणिदानं च । (५) बाले यातरि यानस्थः स्वामी दण्ड्यः । अस्वामिनि यानस्थः प्राप्तव्यवहारो वा याता । बालाधिष्ठितमपुरुषं वा यानं राजा हरेत् ।


जाने पर होता है; इसीलिए उक्त वस्तुओं द्वारा हाथी के पूजन का विधान बताया गया है । किन्तु यदि कोई व्यक्ति महावत की लापरवाही के कारण मारा जाय तो महावत को उत्तम साहस दण्ड दिया जाय ।

( १ ) यदि कोई स्वामी अपने सींग, खुर या दाँत वाले पशुओं द्वारा किसी व्यक्ति को मारते हुए देखकर न छुड़ाये तो उसे प्रथम साहस दण्ड दिया जाय । उस व्यक्ति के चिल्लाने पर भी यदि न छुड़ाये तो स्वामी को दुगुना दण्ड दिया जाय ।

( २ ) यदि सींग-दाँत वाले जानवर आपस में लड़कर एक-दूसरे को मार दें तो मारने वाले जानवर का मालिक मरे हुए जानवर की कीमत और उतना ही दण्ड भरे ।

( ३ ) जो कोई व्यक्ति देव निमित्त किसी पशु को, साँड़ को, बैल को या बछड़ी को हल या गाड़ी में जोते तो उस पर पाँच-सौ पण दण्ड किया जाय । यदि इन्हें कोई घर से निकाले या दूर छोड़ आवे तो उसे उत्तम साहस दण्ड दिया जाय । किन्तु उन्हें यदि किसी देवकार्य या पितृकार्य के लिए दूर छोड़ना पड़े तो कोई दोष नहीं है ।

( ४ ) यदि बैल की नाथ टूट जाय या जुआ टूट जाय अथवा जुता हुआ बैल ही तिरछा हो जाय या सामने की ओर उल्टा हो जाय या गाड़ियों एवं पशुओं की भारी भीड़ हो, ऐसे समय यदि किसी पशु को चोट पहुँच जाय तो गाड़ीवान को दोषी न समझा जाय । ऐसी स्थिति न हो और मनुष्य या पशु को कोई चोट पहुँचे तो, चोट पहुँचाने वाले को पूर्वोक्त यथोचित दण्ड दिया जाय । यदि कोई छोटा पशु दबकर मर जाय तो वही पशु लिया जाय ।

( ५ ) यदि गाड़ीवान नाबालिग हो तो उसका मालिक इन सब दण्डों को भुगते । यदि मालिक उपस्थित न हो सवारी अथवा दूसरा बालिग गाड़ीवान दण्डों को भुगते । यदि गाड़ी में बालक के अतिरिक्त कोई न हो तो राजपुरुष उसे जब्त कर लें ।