भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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पृष्ठ 485

प्र० ८८ : अ० १३ ] अतिचार का दण्ड ४०१

(१) कृत्याभिचाराभ्यां यत्परमापादयेत्, तदापादयितव्यः । (२) कामं भार्यायामनिच्छन्त्यां कन्यायां वा दारार्थिनां भर्तरि भार्यायां वा संवननकरणम् । अन्यथा हिंसाया मध्यमः साहसदण्डः । (३) मातापित्रोर्भगिनीं मातुलानीमाचार्याणीं स्नुषां दुहितरं भगिनीं वाधिचरतस्त्रिलिङ्गच्छेदनं वधश्च । सकामा तदेव लभेत । दासपरिचारकाहितकभुक्ता च । (४) ब्राह्मण्यामगुप्तायां क्षत्रियस्योत्तमः, सर्वस्वं वैश्यस्य । शूद्रः कटाग्निना दह्येत । सर्वत्र राजभार्यागमने कुम्भीपाकः । (५) श्वपाकीगमने कृतकबन्धाङ्कः परविषयं गच्छेत् । श्वपाकत्वं वा शूद्रः । (६) श्वपाकस्यार्यागमने वधः । स्त्रियाः कर्णनासाच्छेदनम् । (७) प्रव्रजितागमने चतुर्विंशतिपणो दण्डः । सकामा तदेव लभेत ।


( १ ) जो व्यक्ति किसी को कृत्रिम उपायों (कृत्या) या तान्त्रिक प्रयोगों (अभिचार) द्वारा तंग करे उसे गिरफ्तार कर लिया जाय ।

( २ ) पति को न चाहने वाली स्त्री पर उसका पति, कन्या को पत्नी बनाने की इच्छा रखने वाला पुरुष और अपने पति पर उसकी पत्नी, यदि वशीकरण आदि प्रयोग करें तो अपराध न माना जाय । इनके अतिरिक्त तान्त्रिक प्रयोग करने वालों को मध्यम साहस दण्ड दिया जाय ।

( ३ ) जो पुरुष अपनी मौसी, बूआ, मामी, गुरुपत्नी, पुत्रवधू, लड़की और बहिन के साथ व्यभिचार करे उसका लिंग और अंडकोश काटकर उसको प्राणदण्ड की सजा दी जाय । यदि मासी, बूआ आदि स्वयं ऐसा करायें तो उनके दोनों स्तन काटकर और उनका भग-छेदन कर उन्हें भी प्राणदण्ड की सजा दी जाय । दास और परिचारक यदि व्यभिचार करें तो उन्हें भी यही दण्ड दिया जाय ।

( ४ ) लोक-लाज से रहने वाली ब्राह्मणी के साथ यदि क्षत्रिय व्यभिचार करे तो उसे उत्तम साहस दण्ड दिया जाय; यदि वैश्य करे तो उसकी सारी सम्पत्ति हड़प ली जाय, यदि शूद्र करे तो उसको तिनकों की आग में जला दिया जाय । राजा की स्त्री के साथ जो कोई भी व्यभिचार करे उसे तपे भाड़ में भून दिया जाय ।

( ५ ) चाण्डालिनी के साथ व्यभिचार करने वाले पुरुष के माथे पर योनि का निशान दाग कर उसे देश-निर्वासन का दण्ड दिया जाय, यदि ऐसा शूद्र करे तो उसे चाण्डाल बना दिया जाय ।

( ६ ) चांडाल यदि किसी आर्या स्त्री के साथ संभोग करे तो उसे प्राणदण्ड दिया जाय और उस पर स्त्री के नाक-कान काट दिये जाँय ।

( ७ ) संन्यासिनी के साथ संभोग करने वाले पर चौबीस पण दण्ड किया जाय,

२६ कौ०

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