भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

पृष्ठ 494, कुल 918 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 494

४१० कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ पांचवां अधिकरण

रुत्पादिते वा तीक्ष्णाः शस्त्रं पातयित्वा ब्रूयुः—‘एवं क्रियन्ते येऽमुना कलहायन्ते’ इति। तेन दोषेणेतरे नियन्तव्याः।

(१) येषां वा दूष्याणां जातमूलाः कलहाः तेषां क्षेत्रखलवेश्मान्यादीपयित्वा बन्धुसम्बन्धिषु वाहनेषु वा तीक्ष्णाः शस्त्रं पातयित्वा तथैव ब्रूयुः—‘अमुना प्रयुक्ताः स्मः’ इति। तेन दोषेणेतरे नियन्तव्याः।

(२) दुर्गराष्ट्रदूष्यान् वा सत्रिणः परस्परस्यावेशनिकान् कारयेयुः। तत्र रसदा रसं दद्युः। तेन दोषेणेतरे नियन्तव्याः।

(३) भिक्षुकी वा दूष्यराष्ट्रमुख्यं दूष्यराष्ट्रमुख्यस्य भार्या स्नुषा दुहिता वा कामयत इत्युपजपेत्। प्रतिपन्नस्याभरणमादाय स्वामिने दर्शयेत्—असौ ते मुख्यो यौवनोत्सिक्तो भार्यां स्नुषां दुहितरं वाभिमन्यते इति। तयोः कलहो रात्रौ इति समानम्।

(४) दूष्यदण्डोपनतेषु तु युवराजः सेनापतिर्वा किञ्चिदुपकृत्यापक्रान्तो


झगड़ा होने पर, दूष्य नगरों में झगड़ा होने पर; तीक्ष्ण गुप्तचर ही दूष्यों को मार डाले और उस हत्या का आरोप दूसरे दूष्यों पर थोप दें। जो भी लड़ाई-झगड़ा करेंगे, उन्हें इसी प्रकार मरवा दिया जायेगा, ऐसा कहकर दूसरे दूष्यों को भी मरवा दिया जाय।

(१) तीक्ष्ण गुप्तचरों को चाहिए कि वे ‘आपस में पुरानी दुश्मनी को लेकर आने वाले दूष्य पुरुषों के खेत, खलिहान, मकान आदि को जलाकर, उनके बंधु-बांधवों, साथियों और पशुओं को हथियार से मार करके यह प्रचारित करें कि ‘अमुक व्यक्ति ने हमें ऐसा कार्य करने के लिए कहा था।’ उसके बाद वे बताये गए लोग गिरफ्तार कर शूली पर चढ़ाये जांय।

(२) सभी गुप्तचर आपसी दुश्मनी रखने वाले दूष्यों को परस्पर मिलाकर एक-दूसरे के घर में उन्हें निमंत्रण दिलवायें और तीक्ष्ण गुप्तचर भोजन में विष डालकर उनमें से एक को मार दें, दूसरे को हत्या के अपराध में गिरफ्तार कर फाँसी दी जाय।

(३) अथवा गुप्तचर भिक्षुकी राष्ट्र के किसी उच्चपदस्थ दूष्य से कहे कि ‘अमुक दूष्य की पत्नी, पुत्रवधू या लड़की उस पर अनुरक्त है।’ यदि वह विश्वास कर ले तो उससे कोई आभूषण आदि लेकर दूष्य को दिखलाये और ‘वह अमुक महाधिकारी जवानी में मतवाला हो कर तुम्हारी पत्नी, पुत्रवधू आदि को चाहता है।’ इस प्रकार उनका आपस में झगड़ा हो जाने के बाद रात में तीक्ष्ण या चर एक को मार डाले और फैला दे कि उसको अमुक दूष्य ने मारा है, इसी अपराध में उस दूसरे दूष्य को भी गिरफ्तार किया जाय।

(४) दण्डोपरान्त (सेना द्वारा या में किये गये) दूष्यों के साथ युवराज या