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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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पृष्ठ 697
प्रकरण १४३बाह्याभ्यन्तराश्चापदः
अध्याय ५

(१) सन्ध्यादीनामयथोद्देशावस्थापनमपनयः। तस्मादापदः सम्भवन्ति। (२) बाह्योत्पत्तिरभ्यन्तरप्रतिजापा। अभ्यन्तरोत्पत्तिर्बाह्यप्रतिजापा। बाह्योत्पत्तिर्बाह्यप्रतिजापा। अभ्यन्तरोत्पत्तिरभ्यन्तरप्रतिजापा। इत्यापदः। (३) यत्र बाह्या अभ्यन्तरानुपजपन्ति, अभ्यन्तरा वा बाह्यान् तत्रोभय-योगे प्रतिजपतः सिद्धिर्विशेषवती। सुव्याजा हि प्रतिजपितारो भवन्ति, नोपजपितारः। तेषु प्रशान्तेषु नान्याञ्शक्नुयुरुपजपितुमुपजपितारः। कृच्छ्रोपजापा हि बाह्यानामभ्यन्तरास्तेषामितरे वा। महतश्च प्रयत्नस्य वधः, परेषामर्थानुबन्धश्चात्मनोऽन्य इति।


बाह्य और आभ्यन्तर आपत्तियाँ

(१) सन्धि, विग्रह आदि छः गुणों का उनके उचित स्थानों पर उपयोग न करना ही अपनय है। इस अपनय के कारण ही सारी विपत्तियाँ पैदा होती हैं।

(२) बाह्य और आभ्यन्तर आपत्तियाँ चार तरह से पैदा होती हैं। १. राष्ट्र-मुख्य तथा अन्तपाल आदि बाह्य लोगों के द्वारा उत्पन्न और मन्त्री, पुरोहित आदि आभ्यन्तर लोगों के द्वारा प्रोत्साहित पहिली आपत्ति है, २. आभ्यन्तर लोगों के द्वारा उत्पन्न और बाह्य लोगों के द्वारा प्रोत्साहित दूसरी आपत्ति है, ३. बाह्य लोगों के द्वारा उत्पन्न और उन्हीं के द्वारा प्रोत्साहित तीसरी आपत्ति है, इसी प्रकार ४. आभ्यन्तर लोगों के द्वारा उत्पन्न और उन्हीं से प्रोत्साहित चौथी आपत्ति है।

(३) जहाँ अपने देश के लोग विदेशियों से या विदेशी लोग अपने देश के लोगों से मिलकर षड्यन्त्र रचते हैं, उनमें से जो लोग षड्यन्त्र करने के लिए बहकाये गये (प्रतिजापिता) हैं उनको साम, दाम आदि उपायों से अपने वश में कर लेना अधिक लाभप्रद है, क्योंकि ऐसे लोगों का उद्देश्य धन लेना होता है। किन्तु षड्यन्त्र के लिए बहकाने वाले (उपजपिता) लोगों को सहज ही में वश में नहीं किया जा सकता है, क्योंकि उनके उद्देश्य का पता लगाना बड़ा कठिन होता है। इस प्रकार प्रतिजापित लोगों को यदि एक बार शान्त कर दिया जाय तो उपजपित फिर दूसरे लोगों को, भेद फूट जाने के भय से, उनकी जगह तैयार करने का साहस नहीं कर पाते हैं। ऐसी स्थिति में बाह्य लोगों का आभ्यन्तर लोगों से और आभ्यन्तर लोगों

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