कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६१४ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ नौवाँ अधिकरण
(१) अभ्यन्तरेषु प्रतिजपत्सु सामदाने प्रयुञ्जीत । स्थानमानकर्म सान्त्वम् । अनुग्रहपरिहारौ कर्मस्वायोगो वा दानम् । (२) बाह्येषु प्रतिजपत्सु भेददण्डौ प्रयुञ्जीत । सत्रणो मित्रव्यञ्जना वा बाह्यानां चारमेषां ब्रूयुः—‘अयं वो राजा दूष्यव्यञ्जनैरतिसन्धातुकामो, बुध्यध्वम्’ इति । दूष्येषु वादूष्यव्यञ्जनाः प्रणिहिता दूष्यान् बाह्यैर्भेदयेयुः, बाह्यान् वा दूष्यैः । दूष्याननुप्रविष्टा वा तीक्ष्णाः शस्त्ररसाभ्यां हन्युः । आहूय वा बाह्यान् घातयेयुरिति । (३) यत्र बाह्या बाह्यानुपजपन्ति, अभ्यन्तरानभ्यन्तरा वाः तत्रैकान्त-
का बाह्य लोगों से उपजाप करना बड़ा कठिन हो जाता है। उपजाप को स्वीकार करके यदि फिर वह फूट जाय तो उपजापिता का बड़ा भारी अनिष्ट हो जाता है, क्योंकि उसके एक महान् प्रयत्न की हत्या हो जाती है । इस तरह षड्यन्त्र का भंडाफोड़ हो जाने पर उपजाप्य व्यक्ति तो अपने स्वामी की प्रसन्नता से अभीष्ट लाभ को प्राप्त करता है और उपजापिता व्यक्ति अपने स्वामी की अप्रसन्नता से अनर्थ का भागी होता है ।
(१) यदि मन्त्री, पुरोहित आदि आभ्यन्तर व्यक्ति ही षड्यन्त्रकारियों को प्रोत्साहित करने वाले हों तो उन्हें साम और दान उपायों से शान्त कर देना चाहिए । विशेषाधिकार स्थानों पर नियुक्त करना तथा विशेष सम्मान देना साम कहलाता है, और धन देना, कर्जा तथा कर आदि से मुक्त कर देना एवं विशेष कार्यों में प्राप्त सम्पूर्ण फल को दे देना दान कहलाता है ।
(२) यदि षड्यन्त्र को प्रोत्साहित करने वाले लोग बाहरी हों तो उन्हें शान्त करने के लिए भेद और दण्ड का प्रयोग करना चाहिए । मित्र के छद्मवेश में रहने वाले गुप्तचर सभी उन बाहरी लोगों से राजा के गुप्त भेद का यह कह कर उद्घाटन करें कि ‘आपका यह राजा राजद्रोहियों के द्वारा आपको मध्यस्थ बनाकर धोखा देना चाहता है । इस रहस्य पर ध्यान देते हुए आप कभी भी इस कार्य में कदम न रखें ।’ अथवा राजद्रोहियों के गुप्त वेष में रहकर विजिगीषु के गुप्तचर भीतरी राजद्रोहियों से बाहरी लोगों का और बाहरी लोगों से भीतरी राजद्रोहियों से का भेद डाल दें । अथवा तीक्ष्ण गुप्तचर राजद्रोहियों के बीच में घुसकर शस्त्र या विष के द्वारा उनका वध कर डाले, अथवा किसी बहाने से बाह्य को अलग ले जा कर चुपचाप उसका वध कर दिया जाय ।
(३) यदि बाहरी, बाहरी लोगों के साथ और आभ्यन्तर, आभ्यन्तर लोगों के साथ षड्यन्त्र रचें और वहाँ यदि समानजातीय षड्यन्त्रकारी हों तो उनमें जो उपजा-