भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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पृष्ठ 705

प्र० १४४ : अ० ६ ] दूष्य और शत्रु-जन्य आपत्तियाँ ६२१

त्मानं रक्षणीयं कथयेत्; अथामित्रशासनं मुख्यायोपघाताय प्रेषितमुभयवेतनौ ग्राहयेत्। (१) उत्साहशक्तिमतो वा प्रेषयेत्—'अमुष्य राज्यं गृहाण यथास्थितो न सन्धिः' इति। ततः सत्रिणः परेषु ग्राहयेयुः। (२) एकस्य स्कन्धावारं विवधमासारं वा घातयेयुः, इतरेषु मैत्रीं ब्रुवाणाः। तं सत्रिणः 'त्वमेतेषां घातयितव्यः' इत्युपजपेयुः। (३) यस्य वा प्रवीरपुरुषो हस्ती हयो वा म्रियेत, गूढपुरुषैर्हन्येत ह्रियेत वा, तं सत्रिणः परस्परोपहृतं ब्रूयुः। ततः शासनमभिशस्तस्य प्रेषयेत्—'भूयः कुरु ततः पणशेषमवाप्स्यसि' इति। तदुभयवेतना ग्राहयेयुः।


आपकी सेवा में रहने योग्य हैं। यदि वे अमात्य आदि विजिगीषु की आज्ञानुसार शस्त्र, विष आदि का ठीक-ठीक प्रयोग कर दें तो उनका भेद गुप्त बना रहने दे और यदि वे शत्रु को मारने में अपनी असमर्थता प्रकट करें तो उनका भेद खोलकर शत्रु द्वारा ही उन्हें गिरफ्तार करा दे। विजिगीषु द्वारा निकाला हुआ वह अमात्य सामवायिक राजाओं के प्रमुख से, यह कह कर भेद डाले कि 'आपको सामवायिक राजाओं के प्रमुखों से अपनी रक्षा करनी चाहिए; क्योंकि वे लोग विश्वास योग्य नहीं हैं।' उसके बाद साधारण सामवायिक राजाओं के उच्छेद के लिए शत्रु द्वारा भेजी हुई पूर्व लिखित कूट आज्ञा को उभयवेतन भोगी व्यक्तियों द्वारा प्रमुख सामवायिक राजाओं के पास पहुँचा दे।

(१) अथवा किसी उत्साही, शक्ति-संपन्न एक ही सामवायिक के पास उस कूट आज्ञा को भिजवाये। उस आज्ञापत्र का मसविदा इस प्रकार होना चाहिए 'आप उस मुख्य सामवायिक राजा के राज्य को ले लें, पूर्व निश्चित संधि अब स्वीकार नहीं की जा सकती है।' इसके बाद सत्री गुप्तचर दूसरे सामवायिकों को यह सूचित कर दे कि अमुक मुख्य सामवायिक के पास इस आशय का एक पत्र आया है।

(२) अथवा सत्री गुप्तचर किसी एक सामवायिक राजा की छावनी (स्कंधावार), आयात-निर्यात के मार्ग तथा उसके मित्रबल को नष्ट कर दें। दूसरे सामवायिक राजाओं से वे अपनी मित्रता बनाये रखें, जिससे कि उनको गुप्त रहस्य का पता न लगे। उसके बाद वह सत्री गुप्तचर उस सामवायिक राजा की दूसरे सामवायिक राजाओं से यह कह कर फूट डाल दे कि 'ये सामवायिक राजा उसे मारना चाहते हैं। ऐसी अवस्था में उनके साथ तुम्हारी संधि कैसे संभव है?'

(३) अथवा सामवायिक राजाओं में किसी राजा का कोई वीर सैनिक, हाथी या घोड़ा मर जाय या गुप्तचरों द्वारा मार दिया जाय अथवा अपहरण कर लिया जाय, तो सत्री गुप्तचर उसको किसी दूसरे सामवायिक द्वारा मारा गया बतायें।