कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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अर्थशास्त्र का प्रणेता
कामन्दकीय नीतिसार के पूर्वोक्त प्रमाणों से सुनिश्चित है कि अर्थशास्त्र का निर्माण आचार्य कौटिल्य ने किया। कुछ दिन पूर्व विदेशी विद्वानों के एक वर्ग ने यहाँ तक सिद्ध करने की चेष्टा की थी कि अर्थशास्त्र एक जाली ग्रन्थ है और जिसके नाम को उसके साथ जोड़ा गया है, वह कौटिल्य भी एक कल्पित नाम है। विदेशी विद्वानों की इन भ्रांत धारणाओं को व्यर्थ सिद्ध करने वाली नयी खोजों का सविस्तार उल्लेख आगे किया जायेगा। यहाँ तो इतना ही बता देना यथेष्ट है कि अर्थशास्त्र का प्रणेता विष्णुगुप्त कौटिल्य ही था।
अर्थशास्त्र में समाप्ति-सूचक एक श्लोक आता है, जिसका निष्कर्ष है कि इस ग्रन्थ की रचना उसने की, जिसने की शस्त्र, शास्त्र और नन्द राजा द्वारा शासित पृथ्वी का एक साथ उद्धार किया—
येन शास्त्रं च शस्त्रं च नन्दराजगता च भूः ।
अमर्षेणोद्धृतान्याशु तेन शास्त्रमिदं कृतम् ॥
—अर्थशास्त्र, पृ० ७७१
अर्थशास्त्र के इस श्लोक में वर्णित नन्दराज द्वारा शासित राजसत्ता को विनष्ट कर उसकी जगह मौर्य साम्राज्य की प्रतिष्ठा करने वाले अद्भुत राजनीति-विशारद आचार्य कौटिल्य का निर्देश पुराण और नीति ग्रन्थों के अनुसार पहिले किया जा चुका है। इससे प्रमाणित है कि अर्थशास्त्र का निर्माता कौटिल्य ही था। उक्त श्लोक में कौटिल्य की अहंवादिता का आभास मिलता है, जो कि सर्वथा युक्त है। ऐसा विदित होता है कि आचार्य कौटिल्य अर्थशास्त्र के निष्णात पंडित तो थे ही, साथ ही दूसरे शास्त्रों और शस्त्र-विद्याओं में भी कुशल थे।
अर्थशास्त्र और कौटिल्य के सम्बन्ध में कुछ दिन पूर्व जो विवाद चल पड़ा था, आधुनिकतम अनुसन्धानों ने उसको सर्वथा व्यर्थ सिद्ध कर अन्तिम रूप से यह प्रमाणित कर दिया है कि अर्थशास्त्र का निर्माता आचार्य विष्णुगुप्त कौटिल्य ही था।
अर्थशास्त्र का उद्धार
अर्थशास्त्र और उसके निर्माता कौटिल्य के सम्बन्ध में जितना विवाद रहा, उससे कहीं अधिक भ्रमपूर्ण धारणाएँ उसके स्थिति-काल के सम्बन्ध में प्रचारित हुईं। आचार्य कौटिल्य की जीवन-सम्बन्धी जानकारी और उनके अद्भुत ग्रन्थ अर्थशास्त्र की छान-बीन करने में विदेशी विद्वानों का वर्षों तक