कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ
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प्र० १४७ : अ० १ ] छावनी का निर्माण ६३९
(१) पुरस्तादध्वनः सम्यक्प्रशास्ता रक्षणानि च । यायाद्वर्द्धकिविष्टिभ्यामुदकानि च कारयेत् ॥
इति सांग्रामिके दशमेऽधिकरणे स्कन्धावारनिवेशो नाम प्रथमोऽध्यायः;
आदितोऽष्टाविंशदुत्तरशततमः ।
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( १ ) प्रशास्ता ( कंटकशोधन-अधिकारी ) को चाहिए कि वह सेना और राजा के प्रस्थान करने से पहिले कारीगरों, मजदूरों तथा अध्यक्षों को साथ लेकर चला जाय और मार्गरक्षा का तथा आवश्यकतानुसार जल आदि का अच्छी तरह प्रबंध करे ।
इति सांग्रामिक नामक दसवें अधिकरण में स्कन्धावारनिवेश नामक
पहला अध्याय समाप्त ।
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