कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्र० १५८-१५९ : अ० ६ ] व्यूह-प्रतिव्यूह-स्थापना ६६५
(१) पत्त्यश्वरथद्विपानां पूर्वं पूर्वमुत्तरेण घातयेत् । हीनाङ्गमधिकाङ्गेन चेति । (२) अङ्गदशकस्यैकः पतिः पदिकः, पदिकदशकस्यैकः सेनापतिः, तद्दशकस्यैको नायक इति । स तूर्यघोषध्वजपताकाभिर्व्यूहाङ्गानां संज्ञाः स्थापयेद् अङ्गविभागे सङ्घाते स्थाने गमने व्यावर्तने प्रहरणे च । (३) समे व्यूहे देशकालसारयोगात् सिद्धिः । (४) यन्त्रैरुपनिषद्योगैस्तीक्ष्णैर्व्यासक्तघातिभिः । मायाभिर्दैवसंयोगैः शकटैर्हस्तिभूषणैः ॥ (५) दूष्यप्रकोपैर्गोयूथैः स्कन्धावारप्रदीपनैः । कोटीजघनघातैर्वा दूतव्यञ्जनभेदनैः ॥ (६) दुर्गं दग्धं हृतं वा ते कोपः कुल्यः समुत्थितः । शत्रुराटविको वेति परस्योद्वेगमाचरेत् ॥
(१) पैदल, घोड़ा, रथ तथा हाथी इनको उत्तरोत्तर अंग से नष्ट करना चाहिए और हीन अंग को अधिक बलवान् अङ्ग से नष्ट करना चाहिए ।
(२) दस रथ और दस हाथियों के अधिकारी को पदिक; दस पदिकों के अधिकारी को सेनापति; और दस सेनापतियों के अधिकारी को नायक कहा जाता है । उस सर्वोच्चसत्ताधारी नायक को चाहिए कि वह विशेष वाद्य शब्दों द्वारा अथवा पताका-ध्वजाओं द्वारा व्यूह में खड़ी सेना के लिए सांकेतिक इशारों की व्यवस्था करे । युद्ध में खड़ी सेना को बिखराने के लिए, बिखरी हुई सेना को एकत्र करने के लिए, चलती हुई सेना को रोकने के लिए, रुकी हुई सेना को चलाने के लिए तथा आक्रमण करती हुई सेना को लौट आने के लिए तथा प्रहार करने के लिए यथावसर उक्त संकेतों का प्रयोग किया जाय ।
(३) शत्रु सेना और अपनी सेना में बराबर की व्यूह रचना होने पर देश, काल और योग के अनुसार विजय प्राप्त की जानी चाहिए ।
(४) जामदग्न्य आदि यंत्र, औपनिषदिक प्रकरण में निर्दिष्ट उपाय, तीक्ष्ण आदि गुप्तचरों, छल, कपट, ज्योतिष और हाथी के योग्य वेषों से ढके हुए रथ आदि के द्वारा शत्रु सेना को उद्विग्न करना चाहिए ।
(५) शत्रु के दूष्यों में कोप पैदा करके, आगे गायों का झुंड खड़ा करके, छावनी में आग लगाकर, सेना के आगे-पीछे छापा मारकर, गुप्तचरों को शत्रु सेना में घुसाकर शत्रु सेना को बेचैन करना चाहिए ।
(६) 'तेरे दुर्ग को आग लगा दी गई है, तेरे दुर्ग को जीत लिया गया है, तेरे कुल का ही कोई व्यक्ति तेरे विरुद्ध उठ खड़ा हुआ है, तेरा सामंत युद्ध के लिए तैयार