कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्र० १६३ : अ० २ ] मन्त्रयुद्ध ६८५
निमित्तमर्थेनाभिवृष्य परित्यजेत् । तस्यैव परिचारकव्यञ्जनोपदिष्टः सिद्धव्यञ्जनः सांवननिकीमोषधिं दद्याद्, वैदेहकशरीरेऽवघातव्येति । सिद्धे सुभगया अप्येनं योगमुपदिशेद्—राजशरीरेऽवघातव्या इति । ततो रसेनातिसन्दध्यात् । (१) कार्तान्तिकव्यञ्जनो वा महामात्रं राजलक्षणसम्पन्नं क्रमाभिनीतं ब्रूयात् । भार्यामस्य भिक्षुकी—'राजपत्नी राजप्रसविनी वा भविष्यसि' इति । (२) भार्याव्यञ्जना वा महामात्रं ब्रूयात्—'राजा किल मामवरोधयिष्यति, तवान्तिकाय पत्रलेख्यमाभरणं चेदं परिव्राजिकयाऽऽहृतम्' इति । (३) सूदारालिकव्यञ्जनो वा रसप्रयोगार्थं राजवचनामर्थं चास्य
सेविका को प्रचुर धन दे कर अपने उपभोग के लिए उसे फुसलाये और एक बार उसका भोग कर दुबारा उसके पास न जाये । फिर उसी गुप्तचर से प्रेरित होकर दूसरा सिद्ध वेषधारी उस पटरानी की सेविका को वशीकरण औषधि देकर उससे कहे कि 'इस औषधी को अपने व्यापारी प्रेमी के शरीर पर छिड़क देना, वह तुम्हारे वश में हो जायेगा ।' जब दिखावा मात्र के लिए वह व्यापारी वेषधारी गुप्तचर उस सेविका के वश में हो जाय तब उस सुन्दरी पटरानी को भी वशीकरण के प्रयोग का उपदेश दिया जाय । उससे कहा जाय कि 'इस औषधि को राजा के शरीर पर छिड़क देने से वह तुम्हारे काबू में हो जायेगा ।' उस वशीकरण योग में विष मिलाकर इस प्रकार राजा का वध कर दिया जाय ।
(१) अथवा ज्योतिषी ( कार्तान्तिक ) के वेश में रहने वाला गुप्तचर, विश्वासी राजलक्षण-संपन्न महामात्र को यह कहकर फुसलाये कि 'तुम अवश्य ही राजा बनोगे ।' और भिक्षुकी गुप्तचर स्त्री द्वारा उस महामात्र की पत्नी को कहला दिया जाय कि 'तुम पटरानी बनोगी और तुम राजा होने योग्य पुत्र को पैदा करोगी ।' इस प्रकार राजा बनने की इच्छा रखने वाले महामात्र का राजा से विरोध हो जायेगा ।
(२) अथवा महामात्र की स्त्री बनकर रहने वाली छद्मवेश स्त्री उससे कहे कि 'राजा मुझे अवश्य ही अपने अंतःपुर में रोक लेगा । दूती द्वारा लाये गये तुम्हारे नाम के इस पत्र और इन आभरणों से यह साफ जाहिर होता है ।' ऐसा करने से भी महामात्र का राजा के साथ विरोध हो जायेगा ।
(३) अथवा रसोइया ( सूद ) और मांस बनाने वालों ( आरालिक ) के वेष में रहने वाले गुप्तचर विष का प्रयोग करने के लिए राजा के गुप्त कथन को तथा इस लोभ में डालने के लिए दिये हुए राजा के धन को कि, महामात्र को मारना है,