भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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६८६कौटिल्य का अर्थशास्त्र[ बारहवां अधिकरण

लोभनीयमभिनयेत् । तदस्य वैदेहकव्यञ्जनः प्रतिसन्दध्यात्, कार्यसिद्धिं च ब्रूयात् । एवमेकेन द्वाभ्यां त्रिभिरित्युपायैरेकैकस्य महामात्रं विक्रमायाप-गमनाय वा योजयेदिति ।

(१) दुर्गेषु चास्य शून्यपालालाञ्छाः सत्रिणः पौरजानपदेषु मैत्रोनिमित्त-मावेदयेयुः—‘शून्यपालेनोक्ता योधाश्च अधिकरणस्थाश्च—‘कृच्छ्रगतो राजा जीवन्नागमिष्यति न वा; प्रसह्य वित्तमार्जमध्वममित्रांश्च हत’ इति । बहुली-भूते तीक्ष्णाः पौरान् निशास्वाहारयेयुः, मुख्यांश्चाभिहन्युः—‘एवं क्रियन्ते, ये शून्यपालस्य न शुश्रूषन्ते’ इति । शून्यपालस्थानेषु च सशोणितानि ‘शस्त्र-वित्तबन्धनान्युत्सृजेयुः । ततः सत्रिणः—‘शून्यपालो घातयति विलोपयति च’ इत्यावेदयेयुः ।

(२) एवं जानपदान्समाहर्तुर्भेदयेयुः ।


महामात्र के सामने प्रकट कर दें । ठीक उसी समय व्यापारी के वेष में रहने वाला गुप्तचर महामात्र के पास आकर साक्षी रूप में कहे कि ‘राजा के कहने से मैंने तुम्हारे सूद और आरालिक को विष दिया था; मैं नहीं जानता कि वे किस उद्देश्य के लिए ले गये थे ।’ और यह भी बता दे कि ‘इस विष से तत्काल ही मृत्यु हो सकती है ।’ इस प्रकार विजिगीषु के गुप्तचर एक, दो या तीनों प्रयोगों से महामात्र को राजा के विरुद्ध बनाकर दोनों को युद्ध के लिए उभाड़ दें ।

( १ ) शत्रु के स्थानीय दुर्गों में रहने वाले शून्यपाल की ओर सभी गुप्तचर नगरवासियों तथा जनपदवासियों से कहे ‘शून्यपाल ने सेनाओं और राजकर्मचारियों से कहा है कि राजा महान् विपत्ति में फँस गया है । कहा नहीं जा सकता कि वह जीवित लौट भी सकेगा या नहीं ! इसलिए बलपूर्वक आप यथेच्छया जनता से धन लूटें और जो बाधा डाले उसको मार डालें ।’ जब शून्यपाल की यह आज्ञा सर्वत्र फैल जाय तब तीक्ष्ण गुप्तचर अपने आदमियों को रात में नगर की लूट-पाट करने के लिए प्रेरित करें और नगर के प्रमुख व्यक्तियों को मरवा डालें । सब जगह इस बात को फैला दें कि ‘जो शून्यपाल का कहना न मानेंगे उनकी यही हालत की जायेगी ।’ इसी बीच वे रक्त से भीगे अस्त्र-शस्त्र तथा रस्सी आदि को शून्यपाल के स्थान में रखवा दें । तदनन्तर सभी गुप्तचर इस बात का प्रचार करें कि ‘यह शून्यपाल ही सब लोगों को मरवाता तथा लुटवाता है’ इस तरीके से शून्यपाल तथा प्रजा में लड़ाई करा दी जाय ।

( २ ) इसी प्रकार समाहर्त्ता ( टैक्स कलैक्टर ) और जनपदवासियों के बीच फूट डाली जाय ।