भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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प्रकरण १७२## योगवामनम्
अध्याय २

(१) मुण्डो जटिलो वा पर्वतगुहावासी चतुर्वर्षशतायुर्ब्रुवाणः प्रभूतजटिलान्तेवासी नगराभ्याशे तिष्ठेत् । शिष्याश्चास्य मूलफलोपगमनैरमात्यान् राजानं च भगवद्दर्शनाय योजयेयुः । समागतश्च राज्ञा पूर्वराजदेशाभिज्ञानानि कथयेत्—‘शते शते च वर्षाणां पूर्णेऽहमग्निं प्रविश्य पुनर्बालो भवामि, तदिह भवत्समीपे चतुर्थमग्निं प्रवेक्ष्यामि । अवश्यं मे भवान्मानयितव्यः, त्रीन् वरान् वृणीष्व’ इति । प्रतिपन्नं ब्रूयात्—‘सप्तरात्रमिह सपुत्रदारेण प्रेक्षाप्रहवणपूर्वं वस्तव्यम्’ इति । वसन्तमवस्कन्देत ।

(२) मुण्डो वा जटिलो वा स्थानिकव्यञ्जनः प्रभूतजटिलान्तेवासी बस्तशोणितदिग्धां वेणुशलाकां सुवर्णचूर्णेनावलिप्य वल्मीके निदध्यादुपजिह्विकानुसरणार्थं, स्वर्णनालिकां वा । ततः सत्री राज्ञः कथयेत्—‘असौ सिद्धः


कपट उपायों द्वारा राजा को लुभाना

( १ ) मुण्डित या जटाधारी साधु के वेश में पहाड़ की गुफा में अपने अनेक शिष्यों सहित रहने वाले गुप्तचर अपनी आयु को चार सौ वर्ष की बताकर नगर के समीप डेरा डालें । वे शिष्य लोग राजा तथा उसके अमात्यों को कन्द, मूल, फल लेकर उस भगवत्स्वरूप सिद्ध पुरुष के दर्शन करने के लिए उत्साहित करें । जब राजा उसके दर्शनार्थ जाये तब वह साधुवेशधारी गुप्तचर प्राचीन राजाओं और देशों के संबंध में अनेक बातें बताये तथा कहे ‘मैं सौ वर्ष बीत जाने पर अग्नि में प्रवेश करके फिर बालक बन जाता हूँ । अब यहाँ पर आपके सामने चौथी बार अग्नि में प्रवेश करूँगा । कुछ वरदान देकर मैं आपको संमानित करना चाहता हूँ । अपने इच्छानुसार आप मुझसे तीन वर माँग सकते हैं ।’ यदि राजा इन बातों को मान ले तो आगे कहें ‘आप अपने स्त्री-पुत्रों सहित सात रात्रि तक खेल-तमाशा कराते हुए तथा उत्सव मनाते हुए यहाँ मेरे आश्रम पर निवास करें ।’ जब वह राजा सपरिवार वहाँ रहने लगे तो सोते समय चुपके से उसको मार दिया जाय ।

( २ ) अथवा मुंडित या जटाधारी के वेश में अनेक शिष्यों सहित किसी स्थान में रहने वाला मठाधीश गुप्तचर बकरे के खून से सनी तथा स्वर्ण चूर्ण से लिपटी, या सुवर्ण युक्त एक बाँस की नली को जंगल में जाकर पहिचान के लिए किसी बाँबी में रख दे । वह बाँस की नली ऐसे स्थान पर रख दी जाय जिससे सांप आसानी से