भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

पृष्ठ 797, कुल 918 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 797

प्र० १७२ : अ० २] योगवामन ७१३

(१) एतान् वा योगानात्मनि दर्शयित्वा प्रतिकुर्वीत, परेषामुपदेशार्थम् । ततः प्रयोजयेद्योगान् । योगदर्शनप्रतीकारेण वा कोशाभिसंहरणं कुर्यात् । (२) हस्तिकामं वा नागवनपाला हस्तिना लक्षण्येन प्रलोभयेयुः, प्रतिपन्नं गहनमेकायनं वाऽतिनीय घातयेयुः, बद्ध्वा वापहरेयुः । (३) तेन मृगयाकामो व्याख्यातः । (४) द्रव्यस्त्रीलोलुपमाढ्यविधवाभिर्वा परमरूपयौवनाभिः स्त्रीभिर्दायादनिक्षेपार्थमुपनीताभिः सत्रिणः प्रलोभयेयुः । प्रतिपन्नं रात्रौ सत्रिच्छन्नाः समागमे शस्त्ररसाभ्यां घातयेयुः । (५) सिद्धप्रव्रजितचैत्यस्तूपदैवतप्रतिमानाम्भीक्ष्णाभिगमनेषु वा भूमिगृहसुरुङ्गागूढभित्तिप्रविष्टास्तीक्ष्णाः परमभिहन्युः । (६) येषु देशेषु याः प्रेक्षाः प्रेक्षते पार्थिवः स्वयम् । यात्राविहारे रमते यत्र क्रीडति वाम्भसि ॥


( १ ) विजिगीषु राजा को चाहिए कि उक्त सभी योगों को वह स्वयं तथा अपने गुप्तचरों, अपने सहायकों को सिखलाये और तब अपने ऊपर किये जाने वाले इस प्रकार के योगों का प्रतीकार कराये । यथावसर उन प्रयोगों द्वारा शत्रु को अपने वश में करे । अथवा इन्हीं प्रयोगों के द्वारा अपना कोष बढ़ाये ।

( २ ) अथवा विजिगीषु के हस्तिवनों के रक्षक पुरुष अच्छे हाथियों को दिखाकर, हाथी की इच्छा रखने वाले शत्रु राजा को, प्रलोभन दें । जब वह इस बात पर राजी हो जाय तो घने जंगल में ले जाकर उसको मार दिया जाय; अथवा गिरफ्तार कर अपने राजा के पास ले आवें ।

( ३ ) इसी प्रकार शिकार की इच्छा रखने वाले शत्रुराजा के संबंध में भी समझना चाहिए ।

( ४ ) अथवा जो राजा धन तथा स्त्रियों की कामना करता हो उसको सत्री गुप्तचर धनसंपन्न विधवा स्त्रियों के द्वारा या दायभाग तथा अमानत के मुकदमों के बहाने वहाँ लायी गयी अत्यंत रूपवती जवान स्त्रियों के जाल में फँसा दिया जाय । जब राजा उनके काबू में हो जाय तब संयोग के लिए किसी एकांत स्थान को नियुक्त कर, वहाँ रात के समय शस्त्र या विष के द्वारा उस राजा को मार दिया जाय ।

( ५ ) अथवा ऐसे अवसरों पर जबकि राजा किसी सिद्ध पुरुष, किसी उच्च भिक्षु या श्मशान के स्तूप, या देवताओं के दर्शनार्थ बार-बार आये-जाये उस समय सुरंग, भूमिगृह तथा गूढभित्तियों में छिपे हुए गुप्तचर उसको मार डालें ।

( ६ ) शत्रुराजा जिन देशों में नाच, गाना, या तमाशा आदि को देखने जाता हो तथा उत्सवों में शामिल होता हो अथवा जहाँ जलक्रीडा करता हो; अथवा जहाँ

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला) · पृष्ठ 797, कुल 918 में से · BharatKosha