भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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प्र० १७३ : अ० ३ ] अपसर्पप्रणिधि ७१७


मवस्कन्देन प्रकाशयुद्धेन वा शत्रुना घातयेत् । अभिविश्वासनार्थं भूमिदान-पुत्राभिषेकरक्षापदेशेन वा ग्राहयेत् । अविषह्यमुपांशुदण्डेन वा घातयेत् । स चेद्दण्डं दद्यात् न स्वयमागच्छेत्' तमस्य वैरिणा घातयेत् । दण्डेन वा प्रयातमिच्छेत् न विजिगीषुणा' तथाप्येनमुभयतः संपीडनेन घातयेत् । (१) अविश्वस्तो वा प्रत्येकशो यातुमिच्छेत्, राज्यैकदेशं वा यातव्यस्य आदातुकामः, तथाप्येनं वैरिणा सर्वसन्दोहेन वा घातयेत् । वैरिणा वा सक्तस्य दण्डोपनयेन मूलमन्यतो हारयेत् । (२) शत्रुभूम्या वा मित्रं पणेत मित्रभूम्या वा शत्रुम् । ततः शत्रुभूमि-लिप्सायां मित्रेणात्मन्यपकारयित्वाभियुञ्जीत । इति समानाः पूर्वेण सर्व एव योगाः ।


भूमि और हिरण्य प्राप्त होगा उसमें तुम्हें भी हिस्सा दिया जायेगा । जब शत्रु-राजा इस बात को स्वीकार कर विजिगीषु राजा के पास आ जाय तो पहले उसका अच्छा स्वागत-सत्कार किया जाय और बाद में सोते समय छिपकर उसका वध कर दिया जाय, अथवा प्रकाशयुद्ध के समय शत्रु के द्वारा ही उसको मरवा दिया जाय । यदि विजिगीषु की विजय हो जाय तो अपनी पूर्व प्रतिज्ञा के अनुसार जीते हुए हिरण्य तथा भूमि देने या पुत्र के राज्याभिषेक करने अथवा अपनी रक्षा करने के बहाने उस सहयोगी शत्रु-राजा को बुलाकर उसे कैद कर ले । यदि शत्रु इस प्रकार भी काबू में न आये तो उपांशु दंड द्वारा उसका वध करा दिया जाय । यदि विजिगीषु की सहायता के लिए शत्रु-राजा स्वयं न आकर अपनी सेना को ही भेज दे तो उस सेना को मुकाबले में लड़ाकर मरवा दिया जाय । यदि विजिगीषु के सहायतार्थ आया हुआ शत्रु-राजा अपनी सेना के साथ ही युद्ध-भूमि में आना चाहे, तब भी दोनों ओर से घेरा डालकर उसको मरवा दिया जाय ।

( १ ) यदि विजिगीषु के अविश्वास के कारण सहायतार्थ आया हुआ वह शत्रु-राजा इस नीयत से युद्ध में जाये कि अमुक हिस्से को जीत कर मैं अपने वश में कर लूंगा तब भी विजिगीषु उस शत्रु-राजा को उसके शत्रु-राजा द्वारा अपनी सम्पूर्ण सैनिक शक्ति के द्वारा अवश्यमेव मरवा डाले; अथवा लड़ाई में व्यस्त उस शत्रु-राजा की राजधानी में भेजकर विजिगीषु उसका अपहरण करवा डाले ।

( २ ) अथवा विजिगीषु राजा को चाहिए कि वह अपने मित्र के साथ छिपे तौर पर यह कह कर संधि कर ले कि 'यदि हम दोनों ने मिलकर शत्रु पर विजय प्राप्त कर ली तो उसकी भूमि को हम आपस में आधा-आधा बाँट लेंगे ।' इसी प्रकार विजिगीषु शत्रु-राजा के साथ भी छिपे तौर पर यह संधि कर ले कि 'हम दोनों मिल कर तुम्हारे अमुक शत्रु पर विजय प्राप्त करके उसकी भूमि को आपस में बराबर बाँट