कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें| प्रकरण १७८ | प्रलम्भने अद्भुतोत्पादनम् |
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| अध्याय २ |
(१) शिरीषोडुम्बरशमीचूर्णं सर्पिषा संहृत्यार्धमासिकक्षुद्योगः । (२) कशेरुकोत्पलकन्देक्षुमूलबिसदूर्वाक्षीरघृतमण्डसिद्धो मासिकः । (३) माषयवकुलत्थदर्भमूलचूर्णं वा क्षीरघृताभ्यां, वल्लीक्षीरघृतं वा समसिद्धं सालपृश्निपर्णीमूलकल्कं पयसा पीत्वा, पयो वा तत्सिद्धं मधुघृताभ्यामशित्वा, मासमुपवसति । (४) श्वेतबस्तमूत्रे सप्तरात्रोषितैः सिद्धार्थकैः सिद्धं तैलं कटुकालाबौ मासार्धमासस्थितं चतुष्पदद्विपदानां विरूपकरणम् । (५) तक्रयवभक्षस्य सप्तरात्रादूर्ध्वं श्वेतगर्दभस्य लण्डयवैः सिद्धं गौरसर्षपतैलं विरूपकरणम् ।
प्रलम्भन योग में अद्भुत उत्पादन
( १ ) सिरण ( शिरीष ), गूलर और शमी इन तीनों के चूर्ण को घी के साथ मिलाकर खाने से पन्द्रह दिन तक भूख नहीं लगती है ।
( २ ) कसेरु, कमल की जड़, गन्ने की जड़, कमल डंडी, दूब, दूध, घी और मांड, इन सबको एक साथ मिलाकर खाने से एक महीने तक भूख नहीं लगती है ।
( ३ ) उड़द, जौ, कुलथी और कुशा की जड़ इन सब को दूध-घी के साथ मिलाकर पीने से एक मास तक भूखा रहा जा सकता है; अथवा अजमोद, दूध और घी को बराबर मिलाकर पी लेने पर भी एक महीने तक भूख नहीं लगती है । इसी प्रकार शालपर्णी ( सालवन ) और पृश्निपर्णी ( पिठवन ) की जड़ों के कल्क को दूध के साथ पीने से या शालपर्णी और पृश्निपर्णी के साथ दूध को पकाकर उसे शहद के साथ खाने से भी एक मास तक भूख नहीं लगती है ।
( ४ ) यदि सफेद बकरे के पेशाब में सात रात तक रखी हुई सरसों से निकाला हुआ तेल एक मास या पंद्रह दिन तक तूम्बी में रखा जाय तो उसके बाद जिन चौपायों या दुपायों पर वह तेल लगाया जायेगा, उनका रूप बदल जायेगा; इसको विरूपकरण ( दूसरा रूप बनाना ) योग कहते हैं ।
( ५ ) इसी तरह किसी आदमी को यदि सात दिन तक मट्ठा और जौ खिलाकर सफेद गधे की लीद तथा जौ के साथ पकाये हुये सफेद सरसों के तेल को लगाने या खाने को दिया जाय तो उसकी शक्ल बदल जाती है ।