भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

पृष्ठ 839, कुल 918 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 839

प्र० १७८ : अ० ३ ] भैषज्यमन्त्रप्रयोग ७५५

सम्पातं कृत्वा मधुघृताभ्यामभिजुहुयात् । तत एकमेतेन मन्त्रेण ग्रामद्वारि गृहद्वारि वा यत्र निखन्यते, तत्सर्वं प्रस्वापयति ।

बलिं वैरोचनं वन्दे शतमायं च शम्बरम् ।
निकुम्भं नरकं कुम्भं तन्तुकच्छं महासुरम् ॥
अर्मालवं प्रमीलं च मण्डोलूकं घटोबलम् ।
कृष्णकंसोपचारं च पौलोमीं च यशस्विनीम् ॥
अभिमन्त्रयित्वा गृह्णामि सिद्धार्थं शवशारिकाम् ।
जयतु जयति च नमः शलकभूतेभ्यः स्वाहा ।
सुखं स्वपन्तु शुनका ये च ग्रामे कुतूहलाः ।
सुखं स्वपन्तु सिद्धार्थं यमर्थं मार्गयामहे ॥
यावदस्तमयादुदयो यावदर्थं फलं मम ॥ इति स्वाहा ।

**(१) एतस्य प्रयोगः—**चतुर्भक्तोपवासी कृष्णचतुर्दश्याम सङ्कीर्ण आदहने बलिं कृत्वा एतेन मन्त्रेण शवशारिकां गृहीत्वा पोत्रीपोट्टलिकां बध्नीयात् । तन्मध्ये श्वाविधः शल्यकेन विद्ध्वा यत्रैतेन मन्त्रेण निखन्यते, तत्सर्वं प्रस्वापयति ।

(२) उपैमि शरणं चार्गिण दैवतानि दिशो दश ।
अपयान्तु च सर्वाणि वशतां यान्तु मे सदा ॥ स्वाहा ।

**(३) एतस्य प्रयोगः—**त्रिरात्रोपोषितः पुष्येण शर्करा एकविंशति-


कांटों को श्मशान भूमि में गाड़ दिया जाय । तदनन्तर सात रात्रि तक उपवास रखने के बाद कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को खैर आदि की समिधाओं से उक्त मंत्रों द्वारा शहद तथा घी मिलाकर उससे १०८ बार अग्नि में हवन किया जाय । उसके बाद श्मशान में गड़े हुए उन कांटों को उखाड़ कर उनको उक्त मंत्रों द्वारा अभिमंत्रित कर घर, गाँव या दरवाजा, जहाँ पर भी गाड़ दिया जाता है वहाँ के सब लोग निद्राग्रस्त हो जाते हैं । यह तीसरा योग है । चौथे प्रस्वापन योग के लिए ‘बलिं वैरोचनम्’ आदि मंत्रों का उपयोग किया जाय ।

(१) प्रयोग-विधि : चार रात तक उपवास करने के बाद कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को खुले हुए श्मशान के मैदान में पशुबलि देकर एक मरी हुई मैना को कपड़े की पोटली में बाँध लिया जाय । उसके बीच में साही का एक काँटा छेद कर उपर्युक्त मंत्र को पढ़ते हुए उस पोटली को जिस स्थान में भी गाड़ दिया जाय वहीं के सब प्राणी सो जायेंगे । यह चौथा योग है ।

( २ ) द्वार खोलने का मंत्र : बंद दरवाजा खोलने के लिए ‘उपैमि शरणम्’ आदि मंत्र का प्रयोग किया जाय ।

( ३ ) प्रयोग-विधि : तीन रात तक उपवास करने के बाद पुष्य नक्षत्र काल