कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें| ७५६ | कौटिल्य का अर्थशास्त्र | [ चौदहवां अधिकरण |
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सम्पातं कृत्वा मधुघृताभ्यामभिजुहुयात् । ततो गन्धमाल्येन पूजयित्वा निखानयेत् । द्वितीयेन पुष्येणोद्धृत्यैकां शर्करामभिमन्त्रयित्वा कवाटमाहन्यात् । अभ्यन्तरं चतसृणां शर्कराणां द्वारमपाव्रियते । (१) चतुर्थभक्तोपवासी कृष्णचतुर्दश्यां भग्नस्य पुरुषस्यास्थ्ना ऋषभं कारयेत्; अभिमन्त्रयेच्चैतेन, द्विगोयुक्तं गोयानमाहृतं भवति; ततः परमाकाशे विक्रामति । (२) सदा रविरविः सगण्डपरिघाति सवं भणाति । चण्डालीकुम्भोत्तम्बकटुकसारीघः सनारीभगोऽसि स्वाहा । (३) तालोद्घाटनं प्रस्वापनं च । (४) त्रिरात्रोपोषितः पुष्येण शस्त्रहतस्य शूलप्रोतस्य वा पुंसः शिरःकपाले मृत्तिकायां तुवरीरावास्योदकेन सेचयेत् । जातानां पुष्येणैव गृहीत्वा रज्जुकां वर्तयेत् । ततः सज्ज्यानां धनुषां यन्त्राणां च पुरस्ताच्छेदनं ज्याच्छेदनं करोति ।
में बहुत-सी खोपड़ियों या कंकड़ियों को लेकर उनके ऊपर अग्नि में शहद और घी से इक्कीस वार आहुति डाल कर हवन किया जाय । उसके बाद गंधमाल्य से उनकी पूजा करके एक गढा खोद कर उसमें उन्हें गाड़ दिया जाय । दूसरे पुष्य नक्षत्र में उन्हें उखाड़ कर उनमें से एक कंकड़ी को उपर्युक्त मन्त्र द्वारा अभिमंत्रित करके बंद दरवाजे पर मार दिया जाय । उसके मारने से चार कंकड़ी के बराबर किवाड़ में छेद हो जायेगा । इसी प्रकार सारे दरवाजे पर छेद करके उसको तोड़ा या खोला जा सकता है ।
( १ ) चार रात तक उपवास करने के बाद कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को किसी पुरुष की टूटी हुई हड्डी पर बैल की मूर्ति बनायी जाय । तदनन्तर उपर्युक्त विधि एवं उपर्युक्त मंत्र के द्वारा होम-पूजा आदि करके उस मूर्ति को अभिमंत्रित किया जाय । ऐसा करने से दो बैलों से जुती हुई गाड़ी वहाँ उपस्थित हो जाती है । उसके द्वारा वह साधक आकाश या पृथ्वी पर कहीं भी घूम सकता है ।
( २ ) ताला तोड़ने तथा सुला देने का मंत्र : 'सदा रविरविः' आदि मंत्र के प्रयोग की वही विधि है, जो दरवाजा खोलने वाले मंत्र के प्रसंग में बतायी गयी है ।
( ३ ) उक्त मंत्र को विधिवत् सिद्ध करके ताला तोड़ा जा सकता है और सुलाया भी जा सकता है ।
( ४ ) धनुष की डोरी काटने का प्रयोग : तीन रात तक उपवास करने के बाद पुष्यनक्षत्र काल में किसी ऐसे पुरुष की खोपड़ी में, जो हथियार से मारा गया हो या शूली पर चढ़ाया गया हो, मिट्टी भर कर उसमें तोर या अरहर बो