कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ
पृष्ठ 904, कुल 918 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 904
८२० कौटिल्य का अर्थशास्त्र
| कर्कटक ५३ | २४५ ३६१ ३८७ | कुष्ठयोग ७४६ |
| कर्मकर ७९ | ४२१ ५४० ७१९ | कुष्ठहर ७६१ |
| कर्मकरकल्प ३१६ | कातान्तिक ३९ ३६१ | कुहक ३६१ |
| कर्मकरव्यअना ६९३ | कार्मान्तिक ४२० | कूटयुद्ध ४७९ ४८३ |
| कर्मचतुष्क ३७८ | कार्मुक १७२ | ६४४ |
| कर्मसंवत्सर १०४ | कार्यकरण ६३७ | कूलपथ ५१३ |
| कर्मसन्धि ५११ | काल १८२ ५९१ | कृतक २८३ |
| कर्मान्त ७९ | कालमान १८१ | कृतश्लेषण ४७९-४८० |
| कर्ष १७४ | काशिक १३४ | कृतविदूषण ४७९-४८० |
| कलत्र ६४० | काक्षिजाज ६७ | कृत्याभिचार ६४८ |
| कलत्र गर्ही ५८१ | काष्ठ ४१४ | कृत्रिम ४४६ |
| कला १८१ | काष्ठफलक ३४६ | कृष्णा १३३ |
| कलिंग ८४ | काष्ठा १८२ | कोदण्ड १७२ |
| कल्प १० | किंजल्क ४३० | कोपजत्रिवर्ग ५६६ |
| कल्पक ३३ ५४१ | किरात ३३ ६९ | कोश ४४१ |
| कल्प ६०९ ६११ | किष्कु १८० | कोशदण्डबल ४४८ |
| कल्याणबुद्धि ६०७ | कुकुर ६६९ | कोशगृह ९५ |
| कल्यारम्भी ४९० | कुक्कुटक २८४ | कोशसम्पद ४४३ |
| काच ५४२ | कुडव १७८ | कोशोपन्त सन्धि ४६४ |
| काचव्यवहारी ४१४ | कुपितमूल ५८१ | कोषक्षय १०९ |
| कात्यायन ४३० | कुप्य १६७ | कोषवृद्धि १०९ |
| कानीन २८२ | कुप्यगृह ९५ | कोषाध्यक्ष १२५ |
| कापटिक २६ २९ | कुप्यवनहस्त १८१ | कोष्ठागार ९५ १५७ |
| ४२२ | कुप्यवर्ग १६७ | ६३८ |
| कामजचतुर्वर्ग ५६६ | कुब्ज ३३ | कौटिल्य ८ १९ २२ |
| कापिशायन २०२ | कुमार ५९ ६६ ४२० | २७ ४६ ५४ ५५ |
| कामोपधा २६ | ४६३ ५७६ | १०५ ११५ २८२ |
| काम्बुक १४४ | कुमारमाता ४२० | ३०४ ३१६ ३२८ |
| कारु १० १९२ | कुमारीपुर ९० | ३२९ ३३६ ४३४ |
| कारुकरक्षण ३४५ | कुम्भ १७८ ५४२ | ४३५ ४५३ ४५५ |
| कारुकर्म १५१ | कुशीलव ३३ ५९ ७२ | ४६८ ४७० ४७१ |
| कारुकुशीलव ४२४ | ८१ २८४ ३५० | ४८१ ४९४ ४९५ |
| कारुरारी १४० | ३६१ ३८७ ४२१ | ४९६ ५०१ ५०६ |
| कारुश ६७ | ५४० ५४२ ७१९ | ५०९ ५१२ ५१३ |
| कारुशिल्पी ५९ १९३ | कुशीलव कर्म १० | ५१४ ५२० ५२८ |