कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ
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शब्दानुक्रमणिका
| ८२५ | ||
|---|---|---|
| प्रसंग ७६५ | भग्नोत्सृष्टक २१६ | भोज १६ |
| प्रसन्ना २०१ | भद्रसेन ६७ | म |
| प्रसादक ६०९ ६१० | भयोपधा २७ | मणि ४१३ |
| प्रसाधक ३३ ५४१ | भर्त्सना १२१ | मणिधातु १३९ |
| प्रस्थ १७८ | भव्यारम्भी ४९० | मण्डल ४४७ ५२१ |
| प्राच्य ८४ | भागानुपविष्टक २१६ | ५३६ ५४४ ६३२ |
| प्राजापत्य २६१ | भाजनी १७६ | ७२९ |
| प्राजापत्यहस्त १८० | भाण्डभार ५४२ | मण्डलव्यूह ६६३ |
| प्रामित्यक १५८ | भार १७६ | मत्तकोकिल ६६ |
| प्रावृत्तिक १२१ | भारद्वाज २० ४४ ५३ | मदन ७६० |
| प्लवक ५४० | ४३० ४३४ ५५५ | मद्रक ६६९ |
| फ | ५६१ ६७९ | मद्य ५७१ |
| फल्गुबल ६५९ | भिगिसी १३४ | मधु ७० २०२ |
| ब | भिक्षुक ३५१ | मध्यभेदी ६५७ |
| बधिर ३३ ३६१ | भिक्षुकी ४२२ | मध्यम २०७ ४४७ |
| बन्धकी पोषक ४१४ | भिन्नकूट ५८१ | ५९१ |
| बन्धनागार ९५ | भिन्नगर्भ ५८१ | मध्यमसाहसदण्ड ३२८ |
| बलवान् ५०८ | भिषक् ७१ | मध्यमा ८४ |
| बलि १५७ | भीतवर्ग ४० ४१ | मनीक ७२ |
| बार्हस्पत्य ८ १०५ | भूतपूर्वं ७३१ | मनु ३७ |
| ३०४ ३२९ ६६२ | भूमि ६५२ ७६५ | मनुष्यपथ ९१ |
| ७६७ | भूमिसन्धि ५०० | मन्त्र ५९० |
| बाल ६३ | भृङ्गराज ६६ | मन्त्रयुद्ध ६८३ |
| बाहुदन्ती २२ | भृगु १६ | मन्त्रशक्तिहीन ५२४ |
| बाह्य ५६२ ५७९ | भृत ५९५ | मन्त्राधिकार ५३९ |
| बाह्यकोप ६०५ | भृतकव्यञ्जन ४१८ | मन्त्रिपरिषद ४७ ६२ |
| वृषली ३२ | भृतकाधिकार ३१७ | ७२ ४२० ७६७ |
| बृहस्पति १ ५५ | भृत्य ६१ | मन्त्री २२ ४२० |
| ब्रह्मचारिन् १० | भृत्यकर्म ४२० | मयूर ६६ ७० |
| ब्रह्मदेय ७७ | भृतबल ५९६ | मरक ५७३ |
| ब्राह्म २६१ | भेद १२३ | मल्लक ६६९ |
| ब्राह्मण १० | भेद्य ५९८ | महत् ४९६ |
| ब्राह्मणबल ६०० | भैषज्य ४१४ | महाकारव ४१४ |
| भ | भोग ६६२ | महान् ६०९ ६११ |
| भक्तवेतन ४३५ | भोगव्यूह ६६३ | महाभोग ५३३ |