कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ
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४२६ | कौटिल्य का अर्थशास्त्र ---|---|---
| मागध २८४ ४२१ ६४८ | मूलहर ११६ ४९० | रथकार २८४ |
| मृग ५७९ | रथपथ ९१ | |
| माणव ३६४ | मृगया ५६८ | रथभूमि ६५१ |
| माणवक ४२२ | मृदुदण्ड १२ | रथयुद्ध ६६० |
| मातृव्यंजना ४१८ | मृद्भाण्ड ४१४ | रथाध्यक्ष २३६ |
| माधुर्यं १२० | मेदक २०१ २०२ | रथिक ४२१ |
| मानव ४७ १०५ ३०४ ३२८ ७६७ | मैरेय २०१ | रथ्य ९१ |
| मोलभृत ४९१ | रसद ३२ ३३ ४२२ | |
| मानव्याजी १६५ | मौलबल ५९५ | रसविद्ध १४३ |
| मानाध्यक्ष १८० | मौहूर्तिक ३९ ६२ ३६१ ४२१ ६३९ | रश्मिकलाप १२६ |
| मानिवर्ग ४१ ४२ | राक्षस २६१ | |
| मानुष ४४५ ५५५ | ### य | राज ५७५ |
| मार्जार ६६ | यजुष् १० | राजपुत्र ५८ |
| माषक १४० | यज्ञ ६३ | राजप्रणिधि ६१ |
| मास १८२ | यम ३८ | राजमहिषी ४२० |
| माहानसिक ६२ ६९ | यवमध्य १८० | राजमार्ग ९१ |
| मित्र ५१ ४४१ ४९१ ४९६ ५२० | यातव्य ४७० ४८४ ४८९ ५२० | राजमाता ४२० |
| राजविवाद ५७५ | ||
| मित्रप्रकृति ४४६ | यान ४५३ | राजबीजी ५०८ |
| मित्रबल ५९६ ५९९ | युक्तारोहक ४२२ | राजवृत्ति ५४ |
| मित्रभावि ४९७ | युग १८२ | राजशब्दी ६७० |
| मित्रमित्र ४४६ ५२१ | युधिष्ठिर ५६९ | राजशब्दोपजीवी ६६९ |
| मित्रसम्पत् ४४३ | युवराज ४१० ४२० | राजसम्पद ४४४ |
| मुख्य ४२१ ५७४ ५७६ | यूकामध्य १८० | राजा ११ १५ १६ ६१ ६३ ६४ ६९ ७८ ७९ ८१ २९० ३५७ ३६५ ३७९ ३८५ ४११ ४१५ ४२३ ४४६ ४४८ ५६२ ५६३ ६०३ ६१५ |
| योग ८ ४४५ ७६५ | ||
| मुख्यक्षय ५७४ | योगपुरुष ७३ ४३५ | |
| मुण्ड ३८ ५४२ ७०९ | योजन १८१ | |
| मुण्डकद्वार ९० | योनिपोषक ४२१ | |
| मुण्डा ३२ | ### र | |
| मुक्ता ४१३ | रजक ३४६ | |
| मुद्राध्यक्ष २३९ | रजत ४१३ | |
| मुष्ककपुष्प ६६ | रज्जु १८१ | राजपजीवी ४२७ |
| मुष्टि १८० | रज्जुमान १८१ | राज्य ५६२ |
| मुहूर्तं १८२ | रथ ६२ ७२ ४२१ | रात्रि १८२ |
| मूक ३३ ३६१ | रथकर्म ६५४ | रावण १६ |